CHINTAN JAROORI HAI

जीवन का संगीत

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इन दंगों से बता हासिल ही क्या हुआ

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सोंपा था चमन जिसे माना था बागबां
इंसानियत की कॉम का समझा था रहनुमां
कुछ पग चला था साथ में
फिर थमा के मेरे हाथ में
खून से सना हुआ खंजर गुजर गया
नजरो के सामने से
कैसा ये मंजर गुजर गया

धर्मान्धता का जूनून था
आँखों में भरा खून था
कल जलाया था उसका मकाँ
आज जल रहा था मेरा आशियाँ
देख ये तमाशा वो
घर से गुजर गया
नजरो के सामने से
कैसा ये मंजर गुजर गया

इन दंगों से बता
हासिल ही क्या हुआ
लख्ते जिगर गया तेरा तो
मेरा भी पुत्र कटा
बुझते चिराग घर के देख
वो जुबाँ से मुकर गया
नजरो के सामने से
कैसा ये मंजर गुजर गया



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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

deepakbijnory के द्वारा
September 17, 2013

धन्यवाद् मदन जी आपके ब्लॉग पैर कमेंट किया न जाने क्यूँ इनवैलिड कोड दिखा रहा था

Madan Mohan saxena के द्वारा
September 17, 2013

बहुत खूब ,सार्थक रचना हेतु बधाई कभी यहाँ भी पधारें। सादर मदन


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