CHINTAN JAROORI HAI

जीवन का संगीत

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नारी तू नारायणी ( कविता )

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नारी तू नारायणी क्यूँ इस जहाँ से डर रही
तू ही जीवनदायिनी क्यूँ मरने से पहले मर रही

आज सियासत मेँ सुरसा ताडका ने ही वास किया
खूनी बलात्कारी को हमेशा उन्होने ही माफ किया

हर बार यूँ ही कत्ल होगी यूँ ही सहती जायेगी
दुर्गा सती काली चंडी को शर्म तुझ पर आयेगी

जब तेरा ही जिस्म तेरे कत्ल का कारण बने
प्रचँड रुप धर आक्रमण करना तेरा ये ही प्रण बने

तुझ से जीत जाने का यम ने भी न साहस किया
शिव भी चरण के नीचे थे जब तूने अट्टाहस किया

उठती थी तुझ पर निगाहेँ आज वो झुकने लगे
तोड दे उस हाथ को जो तेरी ओर बढने लगे

न किसी पर कर भरोसा खुद ही चंडी रूप धर
हाथ जो जिस्म पर उठे काट दे भूमी पे धर



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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

deepakbijnory के द्वारा
September 18, 2013

ब्लॉग में आने के लिए धन्यवाद् आदरणीय निशा जी

nishamittal के द्वारा
September 18, 2013

नारी की चेतना जगाती सुन्दर रचना  


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