CHINTAN JAROORI HAI

जीवन का संगीत

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दीप और बाती (kavita)

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एक दिन एक बाती
दीप से यूं मिल गयी
बोली कौन सा पड़ाव है
उम्र का ठहराव है
मैं जन्म से मलंग हूँ
अपने आप में स्वच्छंद हूँ
बाती अलविदा हुई
दीप से जुदा हुई
अंधकार छा गया
बाती में विकार आ गया
दीप में विकास न रहा
बाती में प्रकाश न रहा

एक दिन एक बूँद
सीप में समां गयी
आते ही घबरा गयी
ये कहाँ मैं आ गयी
मन में जंग छिड़ी हुई
सीप से घिरी हुई
जल के एक बहाव में
बूँद वो निकल पड़ी
अब न कोई प्रभुत्व था
न कोई अस्तित्व था
जाने कहाँ वो खो गयी
माती में विलीन हो गयी

बाती हो या दीप हो
बूँद हो या सीप हो
जब तक वो संग संग हैं
जिंदगी में रंग हैं
मोती का विकास है
दीप में प्रकाश है
बाती का उपदेश है
जीवन का ये सन्देश है



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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

deepakbijnory के द्वारा
October 23, 2013

dhanyawad aadarniya shikha ji

DR. SHIKHA KAUSHIK के द्वारा
October 4, 2013

गहन भावाभिव्यक्ति .आभार


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