CHINTAN JAROORI HAI

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सजायाफ्ता अपराधी को भी संसद में लाने की तैय्यारी थी

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देख रही तमाशा गुपचुप
किङ्कर्तव्यविमुद जनता बेचारी थी
सजायाफ्ता अपराधी को भी संसद में
लाने की तैय्यारी थी
क्या सत्तापक्ष और प्रतिपक्ष
सब ही के चहरे खिले हुए
नंगे सब ही एक हमाम में
संसद के भीतर सब मिले हुए
जागा जमीर महामहिम का
बस ये ही दुश्वारी थी
सजायाफ्ता अपराधी को भी संसद में
लाने की तैय्यारी थी
हुआ खेल सब ख़तम महज ये
सोची समझी साजिश थी
हुआ अध्यादेश वापस युवराज को
पटल पर लाने की कोशिश थी
आजादी को कितने दशक बीत गए
ऐसा न बुरा समय आया
भारत की जनता ने कभी
इतना न खुद को
बेबस ,लुटा ,ठगा पाया
लुट जाता सब आ गयी बीच में
एक माँ के बच्चे की
किलकारी थी
सजायाफ्ता अपराधी को भी संसद में
लाने की तैय्यारी थी



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5 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

deepakbijnory के द्वारा
October 23, 2013

ब्लॉग में आने के लिए धन्यवाद् आदरणीय अनिल कुमार जी

October 4, 2013

सजायाफ्ता अपराधी को भी संसद में लाने की तैय्यारी थी हुआ खेल सब ख़तम महज ये सोची समझी साजिश थी सभी दल एक ही थाली के चट्टे बट्टे .

anilkumar के द्वारा
October 4, 2013

प्रिय दीपक बिजनौरी साहब , यह सजायाफ्ता अपराधी को संसद में लाने की तैय्यारी नहीं , बल्की  सजायाफ्ता अपराधीयों को संसद में लाते रहने की किलेबन्दी थी । वैसे एक अच्छी कविता । बधाई ।

sanjay kumar garg के द्वारा
October 4, 2013

इकदम सही बात!

    deepakbijnory के द्वारा
    October 25, 2013

    धन्यवाद् आदरणीय संजय गर्ग जी ब्लॉग में आने तथा अपने विचार देने के लिए


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