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आस्था के प्रदर्शन पर आत्मनियंत्रण की आवश्यकता?(जागरण जंक्शन फोरम)

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अक्सर यह देखा जाता है की बड़े त्योहारों में मंदिरों में होने वाली भीड़ की वजह से कई मौतें हो जाया करती हैं आखिर इसका क्या कारन है क्यूँ जनता इतनी बड़ी संख्या में दर्शन के नाम पर काल के गाल में समां जाती है यह जानते हुए की ऐसे स्थानों में इस प्रकार की घटनाएँ होती ही रहती हैं
भगवन के दर्शन अन्य किसी दिन भी किये जा सकते हैं यह आस्था नहीं अंध भक्ति है की किसी विशेष दिन गंगा में नहाने से पुण्य प्राप्त होगा क्या अन्य दिन गंगा के पानी में बदलाव आ जायेगा जब हिन्दू धर्म के अनुसार इश्वर हर जगह उपस्थित है तो उसके दर्शन घर में ही क्यूँ नहीं या किसी और दिन क्यूँ नहीं जनता को यह समझना होगा और दर्शन के वक़्त स्वयं भी आत्मनियंत्रित होना होगा हजारों की संख्यां में एक की नासमझी भी खतरनाक साबित हो सकती है
जहाँ तक प्रश्न मंदिर व्यवस्था का है जब मंदिर व्यस्थापकों को यह पहले से मालूम होता है की अनुमानतः कितनी संख्यां में लोग शामिल होंगे तो उन्हें पहले ही स्वयंसेवकों का इंतजाम रखना चाहिए तथा प्रशाशन से भी जरूरी मदद लेनी चाहिए क्या मंदिर प्रशाशन चादावे से प्राप्त धन से मौज करने के लिए ही है यदि इस धन का दस प्रतिशत भी व्यवस्था पर खर्च किया जाय तो ऐसी दुर्घत्नायों की पुनरावृत्ति न हो
ऐसे मौकों पर पुलिसे को भी उचित प्रशिक्षण की आवश्यकता है दरअसल हमारी पुलिस भीड़ को नियंत्रित तो कर सकती है परन्तु उन्हें ऐसे मौकों में भीड़ मैनेजमेंट का न तो कोई अनुभव होता है और न ही कोई प्रशिक्षण अल्लाहाबाद कुम्भ का ही उदहारण ले वहां सबसे पहले आस्था से भरी जनता को नियंत्रित करने का तथा मैनेज करने प्रशिक्षण दिया गया आस्था से भरी भीड़ लाथिचार्गे जैसी घटनाओं से और भी अनियंत्रित और उग्र हो सकती है
वैष्णो देवी का ही उदहारण ले वहां कभी कोई ऐसी घटना नहीं घटती वहां मंदिर में प्रबंधन की उचित इंतजाम हैं जरुरत से ज्यादा भीड़ होने पर उन्हें पहले से ही रोक दिया जाता है मंदिर केवल आस्था के तथा चडावे में आये धन की बंदरबांट के लिए नहीं हैं जितनी मंदिर में उचित इंतजाम होंगे उतना ही जनता में आस्था का भी इजाफा होगा आज जरुरत है मंदिर के प्रबंधन को उचित पूर्वानुमान के आधार पर उचित व्यस्था करने की जितना पैसा बाद में मुवावजे के रूप में दिया जाता है उसका दस फीसदी भी इन्तेजामत पर खर्च हो तो यह घटनाएँ ही न हो



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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

deepakbijnory के द्वारा
October 19, 2013

anuchchhed के मुख्यांश dainik jagran me praastut करने हेतु jagranjunction parivar ka dhanyawad

jlsingh के द्वारा
October 16, 2013

आपसे शत प्रतिशत सहमत हूँ!


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