CHINTAN JAROORI HAI

जीवन का संगीत

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जिन दरख्तोँ की छाँव मेँ (कविता)

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जिन दरख्तोँ की छाँव मेँ

खेलते थे गाँव मेँ

काँटे लगे जो पाँव मेँ

सहलाये जख्म

उसी की पनाह मेँ

उन्हीँ दरख्तोँ को अपने हाथ से

गिराना पड गया

अपने को अपने आप से

हराना पड गया

नये जमाने की दौड मेँ

तरक्की की इस होड मेँ

जीवन की जोड तोड मेँ

यही था मुनासिब

मन को इसी बात से

बहलाना पड गया

अपने को अपने आप से

हराना पड गया

गोद मेँ जिसके बडे

कंधोँ मेँ जिसके चडे

खिलोनोँ को जिद पे अडे

अपने ही हाथ अग्नि मेँ

जलाना पड गया

अपने को अपने आप से

हराना पड गया



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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

deepakbijnory के द्वारा
October 24, 2013

धन्य वाद विजय जी ब्लॉग में आने तथा हौसला बदने के लिए

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
October 23, 2013

isee kaa naam jeevan hai bandhu ! sundar kkavyaatmak prastuti ke lie haardik badhaai deepak jee !


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