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जनमत सर्वेक्षण महज एक मनोरंजक कार्यक्रम (जागरण जंक्शन फोरम )

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आम तौर पैर यह देखा गया है की इलेक्शन से पहले कई प्रकार के सर्वेक्षण होते रहते हैं जो मीडिया चैनलों के अपने अपने निजी झुकाव के अनुसार राजनितिक पार्टी के जीतने की भविष्यवाणी करते हैं इन सर्वेक्षणों का विश्वास नहीं किया जा सकता क्योंकि ये सर्वे में मात्र कुछ इलाकों के बुद्धिजीवी वर्ग को शामिल करते हैं और भारत की राजनीती के इतिहास में बुद्धिजीवी वर्ग का योगदान सबसे कम रहता है वैसे भी जो मीडिया टी आर पी की भूख की खातिर एक बाबा के सपने को भी इतनी बार प्रसारित करता है की सरकार तक को वह बात सच मानकर खुदाई का आदेश देना पड़ता है सपनो को तवज्जो देने वाले इस मीडिया पर भरोसा करना कितना तर्कसंगत और प्रासंगिक है अब तो विभिन्न चैनलों में आने वाले ये सर्वेक्षण जनता के लिए मनोरंजन का प्रोग्राम बनकर रह गए हैं
कुछ लोगों का मानना है की इन भ्रामक प्रचारों में पड़कर जनता उलझती है परन्तु ऐसा नहीं है लोकतंत्र में आपका वोट आपकी इच्छा के अनुसार पड़ना है इससे कोई फर्क नहीं पड़ता की वह पार्टी जीतती है या नहीं जनता इन दुष्प्रचारों को मनोरंजन की भांति देखती है और स्वयं में मंथन करती है वैसे भी जो पार्टी जीत रही है उसे पड़ने या न पड़ने से कोई फर्क नहीं पड़ता आपको तो बस अपने वोट का प्रयोग करना है और अब तो सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद तो जनता के पास इनमे इ कोई नहीं का विकल्प भी आ गया है जिसको प्रयोग में लाना जनता भली भांति समझती है
अब मैं बात करूँगा उस वर्ग की जो भारत की राजनीती में सबसे ज्यादा प्रभाव डालते हैं वास्तविकता में तो सर्वे में दिखाया जाने वाला बुद्धिजीवी वर्ग या तो वोट डालने नहीं जाता या अपनी विद्वता के मंथन के आधार पर सही पार्टियों में बंट जाता है सबसे ज्यादा प्रभाव डालने वाला निम्न तथा अन्पड वर्ग आज भी धर्म गुरुओं के कहे अनुसार किसी एक पार्टी को वोट दल कर अपने लोकतंत्र के अधिकार की इतिश्री कर देता है या दूसरा बड़ा वर्ग आज भी चन्द बोतलों की या चन्द रुपयों की खातिर किसी एक पार्टी को वोट डालता है हमारे मुल्क में यही वर्ग है जो अपने मताधिकार का सबसे ज्यादा प्रयोग करता है तथा इलेक्शन को आज भी आमदनी तथा मधुशाला जाने का उचित साधन समझता है आज भी इस मुल्क में वोटिंग धर्म ,जाति, क्षेत्र व परिवारवाद के आधार पर होती है
आज जब हमारे देश में सभी को विहारों की अभिव्यक्ति का अधिकार है तो इन सर्वेक्षणों पर प्रतिबन्ध लगाने का तो सवाल ही नहीं पैदा होता बल्कि यह प्रोग्राम जनता एक मनोरंजक राजनितिक सीरियल की भांति अपनी जगह बना रहे हैं और इनसे राजनीती के प्रति ज्ञानवर्धन भी होता है अंत में भारत में होने वाले इलेक्शन की कटु सत्यता को दिखलाती हुई अपनी चन्द पंक्तियों के साथ इस चर्चा को समाप्त करना चाहूँगा

उम्र भर मुफलिसी मेँ जो रोता ही रहा ।

फटेहाल वो गरीब ए हिन्दोस्तान है जनाब ॥

चन्द बोतलोँ की खातिर बिकता है वही ।

इस देश का मतदाता है ये मतदान है जनाब ॥



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8 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

jlsingh के द्वारा
October 25, 2013

सही आकलन! गरीब जो निर्णायक वोट देता है उससे मीडिया वाले पूछने नहीं जाते!

    deepakbijnory के द्वारा
    October 28, 2013

    dhanyawad aadarniya j l singh sahab

bhanuprakashsharma के द्वारा
October 25, 2013

सही कहा आपने। ये सर्वेक्षण  महज मनोरंजन का साधन व टीआरपी बढ़ाने के लिए हैं। आज भी मतदाता जाति व वर्ग के आधार पर बंटा है। 

    deepakbijnory के द्वारा
    October 25, 2013

    प्रिय भानु जी मेरे विचारों को पड़ने तथा उन पर मंथन हेतु धन्यवाद्

October 24, 2013

उम्र भर मुफलिसी मेँ जो रोता ही रहा । फटेहाल वो गरीब ए हिन्दोस्तान है जनाब ॥ चन्द बोतलोँ की खातिर बिकता है वही । इस देश का मतदाता है ये मतदान है जनाब ॥ एकदम सही कहा आपने .ये सर्वेक्षण मात्र जनता को बहकाने के लिए होते हैं और kuchh nahi .

    deepakbijnory के द्वारा
    October 25, 2013

    dhanyawad shalini ji apna keemti samay nikal mera blog padne k liye

deepakbijnory के द्वारा
October 24, 2013

धन्यवाद् योगेन जी ब्लॉग में aane हेतु इसी तरह ब्लॉग में पधारते रहिये आभार

yogi sarswat के द्वारा
October 24, 2013

अब मैं बात करूँगा उस वर्ग की जो भारत की राजनीती में सबसे ज्यादा प्रभाव डालते हैं वास्तविकता में तो सर्वे में दिखाया जाने वाला बुद्धिजीवी वर्ग या तो वोट डालने नहीं जाता या अपनी विद्वता के मंथन के आधार पर सही पार्टियों में बंट जाता है सबसे ज्यादा प्रभाव डालने वाला निम्न तथा अन्पड वर्ग आज भी धर्म गुरुओं के कहे अनुसार किसी एक पार्टी को वोट दल कर अपने लोकतंत्र के अधिकार की इतिश्री कर देता है या दूसरा बड़ा वर्ग आज भी चन्द बोतलों की या चन्द रुपयों की खातिर किसी एक पार्टी को वोट डालता है हमारे मुल्क में यही वर्ग है जो अपने मताधिकार का सबसे ज्यादा प्रयोग करता है तथा इलेक्शन को आज भी आमदनी तथा मधुशाला जाने का उचित साधन समझता है आज भी इस मुल्क में वोटिंग धर्म ,जाति, क्षेत्र व परिवारवाद के आधार पर होती है, टीवी चनेलों को भी काम चाहिए और काम का मतलब है भों भों होती रहे राजनीती पार्टियों के लोगों में !


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