CHINTAN JAROORI HAI

जीवन का संगीत

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बचपन की चाह ( कविता )

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चाह यही है मेरी मैँ भी
आसमान मेँ उड जाऊँ
बादल के संग होली खेलूँ
चिडियोँ संग बतियाऊँ
तितली जैसे पंख लगाकर
परियोँ जैसा इठलाऊँ
अलग अलग फूलोँ मेँ बैठूँ
और मकरन्द चुराऊँ
इन्द्रधनुष के सतरंगी
रंगो सी पतंग बनाऊँ
रेशम की डोरी से उसको
चंदा तक पहूँचाऊँ
रिमझिम रिमझिम
पानी मेँ भीगूँ
कागज की नाव चलाऊँ
रंगबिरंगी मछली संग
पानी मेँ कूद लगाऊँ
आसमान के तारोँ को
झोली मेँ भर कर लाऊँ
जुगनु जैसा चमकूँ मैँ
कण कण मेँ दीप जलाऊँ ॥



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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

deepakbijnory के द्वारा
November 10, 2013

dhanyawad aadarniya yamuna ji mere saubhagya jo aap jaisi lekhika mere blog me aayi yah sab maine apne bete ko samne rakh kalpana karte hue likha hai

yamunapathak के द्वारा
November 10, 2013

कितनी सुन्दर कविता है साभार


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