CHINTAN JAROORI HAI

जीवन का संगीत

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प्रणय निवेदन (कांटेस्ट)

Posted On: 14 Feb, 2014 कविता,Junction Forum,Contest में

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कविता के इस नव प्रभात मेँ ,

तुम ही मेरा वन्दन हो ।

माँ सरस्वति को करुँ समर्पित ,

तुम ही तो वह चन्दन हो।

जीवन की इस नव बगिया मेँ ,

तुम्हीँ भ्रमर का गुंजन हो।

तुम ही मेरी प्रथम प्रेरणा

तुम ही अन्तिम स्पन्दन हो ।

इस उपवन की नवीन लता का

तुम ही तो अवलम्बन हो।

मेरे उर की नव त्रिष्णा का

तुम ही वह आलिँगन हो ।

इस जीवन के प्रथम प्रणय का ,

तुम ही तो वह चुम्बन हो।

पीडा मेँ आनन्दित करता,

अग्नितप्त वह कुन्दन हो।

तुममेँ लिखता तुमको लिखता ,

तुम ही मेरा अभिनन्दन हो

भावनाओं में

मैं न बह सका

अफ़सोस अब तक

तुमसे न कह सका

चूक हो गयी

मूक रह गया

तुम्ही प्रणय निवेदन हो



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9 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

jlsingh के द्वारा
March 2, 2014

भावनाओं में मैं न बह सका अफ़सोस अब तक तुमसे न कह सका चूक हो गयी मूक रह गया तुम्ही प्रणय निवेदन हो बहुत ही सुन्दर दीपक जी, सभी बातें कही नहीं जाती कुछ बातें मूक भाषा में होती है और समझने वाले समझ ही जाते हैं… सादर!

    deepakbijnory के द्वारा
    March 3, 2014

    dhanyawaad aadarniya j l singh jee jo aapne meri bhawnaon ko saraha avita par manthan ke liye sadar naman

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
February 28, 2014

वाह क्या क्या बात है ! सुन्दर काव्यमय प्रेमाभिव्यक्ति ! दीपक जी बधाई ! सादर !!

    deepakbijnory के द्वारा
    March 2, 2014

    dhanyawaad vijai jee sarthak tippani ke liye

kavita1980 के द्वारा
February 28, 2014

सुन्दर  चूक होगई  मूक रह गया  छू गई

    deepakbijnory के द्वारा
    February 28, 2014

    KAVITA JEE ISME SHAYAD APKO APNE ANTARDWAND KA JAWAB MIL JAAY

ranjanagupta के द्वारा
February 14, 2014

सादर !दीपक जी !सुन्दर ,सरस ,और भाव विगलित निवेदन !!बधाई !!

    deepakbijnory के द्वारा
    February 14, 2014

    dhanyawad aadarniya ranjana ji blog me aane ke liye mera saubhagya jo aap jaisi kavyitri mere blog me padhari dhanyawad


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