CHINTAN JAROORI HAI

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सपने

Posted On: 21 Feb, 2014 कविता,Junction Forum,Contest,Hindi Sahitya में

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मैंने कुछ सपने देखे थे
अपने जीवन की
खुशहाली के
फिर किया प्रयास
उनको पूरा करने का
कुछ सपने पूर्ण हुए
कुछ अधूरे रह गए
टूटे सपनों ने हताश किया
सच हुए सपनों ने खुशीयां दी
मगर फिर भी मैं
खुश न हो सका
आज भी मैं सपने देखता हूँ
आज मैं बहुत खुश हूँ
फर्क सिर्फ इतना है
अब मैंने अपने लिए नहीं
दूसरों के लिए सपने देखना
शुरू कर दिया है
सपने उस बीज के लिए
जो मन में सम्पूर्ण
वृक्ष बनने की आशा रखता है
उस उड़ते पंछी के लिए
जो भरी दोपहरी में
पानी की तलाश में
भटकता है और फिर
उन्मुक्त गगन में उड़ने
की आशा रखता है
सपने गर्भ में पलती
उन मासूम कलियों के लिए
जो इस संसार में
आना चाहती हैं
सपने उन निर्झरों के लिए
जो वृक्षों के अनियमित कटान
से सूखते जा रहे हैं
सपने उन बच्चों की
खातिर जो पाठशाला
जाना चाहते हैं
मगर सुबह से ही
मजदूरी करने को
अभिशप्त हैं
सपने उन लहलहाते खेतों
की खातिर जो
जमीन माफिआओं द्वारा
बंटकर बंजर हो रहे हैं
तो आओ आज से कुछ
ऐसे ही विचित्र सपने देखें
उन्हें पूर्ण करने का
छोटा ही सही मगर
प्रयास करें
फिर ये महसूस करें
कि जितनी ख़ुशी
इन सपनों के संपन्न
होने में हुई
इतनी शायद आज तक
कभी महसूस नहीं हुई



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11 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yamunapathak के द्वारा
April 14, 2014

deepak jee bahut sundar bhav ke sath kavita likhee hai aapane

    deepak pande के द्वारा
    April 14, 2014

    DHANYAWAAD ADARNIYA YAMUNA JEE KAVITA PAR MANTHAN KE LIYE AAPKA EK EK COMMENT MERE LIYE PRERNAPRAD HAI

adityaupadhyay के द्वारा
February 27, 2014

सपनो का कोई अंत नहीं , सपनो का कोई वक्त नहीं … हर निद्रा की शरुआत है सपनो से , हर दिन कि शुरुआत है कदमो से .. पर असल ज़िन्दगी में , पहचान है अपनी कर्मो से … बहुत सुन्दर रचना , धन्यवाद सर ऐसी रचनाओं के लिए , धन्यवाद

    deepakbijnory के द्वारा
    February 28, 2014

    BLOG ME AANE KE LIYE DHANYAWAAD AADARNIYA ADITYA JEE

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
February 25, 2014

परहित सुखाय की भावना से ओतप्रोत इस उत्तम निर्बंध प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई दीपक जी ! सादर !!

deepakbijnory के द्वारा
February 24, 2014

kavita ke mukhya ansh dainik jagran me prastut karne ke liye sampadak mahodaya ka hardik dhanyawad http://deepakbijnory.jagranjunction.com/2014/02/21/सपने/

sanjay kumar garg के द्वारा
February 21, 2014

सुन्दर-सपने है आपके, आदरणीय दीपक! जी हर किसी को देखने चाहिए!

    deepakbijnory के द्वारा
    February 21, 2014

    dhanyawaad aadarniya sanjay jo aapne mere sapnon ko samman diya unhe samjha sadar naman

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
February 21, 2014

निस्वार्थ भावना एवं मानवीय संवेदना के अनुपम सौन्दर्य से लवरेज सपने ,सुंदर एवं स्तरीय रचना ,बधाई दीपक जी ,सादर आभार

    deepakbijnory के द्वारा
    February 21, 2014

    DHANYAWAD AADARNIYA NIRMALA JEE JO AAPNE MERE SAPNO KO SARAHA AUR SAMJHA


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