CHINTAN JAROORI HAI

जीवन का संगीत

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माँ [कविता](महिला दिवस पर विशेष )

Posted On: 7 Mar, 2014 कविता,Junction Forum,Special Days में

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माँ

खुशियाँ हैँ जहाँ खेलती वो मेरा ही घर है

सब कहते हैँ मेरी माँ की दुवाओँ का असर है

मैँ भूल के भी उस से जुदा हो नहीँ सकता

मेरी हर एक साँस मेँ उसकी ही बसर है

एक दिन वो टूट कर कुछ ऐसी बिखर गयी

दुनियाँ की हर एक माँ मेँ आती वो नजर है

ख्वाबोँ मेँ भी कोई गम हो तो वो मेरे साथ है

मेरे हर एक गम की मेरी माँ को खबर है

वो मुझ से रूठ कर कहीँ सितारोँ मेँ बस गयी

जिस जहाँ से न लौटा कोई वो ऐसा नगर है

दीपक पाण्डे नैनीताल



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20 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

kavita1980 के द्वारा
May 11, 2014

माँ के प्रति आपकी भावनाएँ छूने वाली हैं –बधाई

    deepak pande के द्वारा
    May 13, 2014

    dhanyawaad aadarniya कविता jee

abhishek shukla के द्वारा
March 13, 2014

बेहतरीन…..

    deepak pande के द्वारा
    March 13, 2014

    dhanyawaad aadarniya abhishek jee

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
March 13, 2014

प्रिय दीपक जी बहुत सुन्दर ..माँ की ममता का कोई जबाब नहीं आइये इन्हे अंत तक गले से लगाये चलें जय श्री राधे होली की शुभ कामनाएं अग्रिम रूप से भ्रमर ५

    deepak pande के द्वारा
    March 13, 2014

    pranam aadarniya surendra jee maa kavita par manthan ka koti koti dhanyawaad

sadguruji के द्वारा
March 12, 2014

PREVIOUS | NEXT माँ [कविता](महिला दिवस पर विशेष ) पोस्टेड ओन: 7 Mar, 2014 Junction Forum, Special Days, कविता में Share this pageFacebook0Google+0Twitter0LinkedIn0 Rss Feed SocialTwist Tell-a-Friend माँ खुशियाँ हैँ जहाँ खेलती वो मेरा ही घर है सब कहते हैँ मेरी माँ की दुवाओँ का असर है मैँ भूल के भी उस से जुदा हो नहीँ सकता मेरी हर एक साँस मेँ उसकी ही बसर है.बहुत अच्छी रचना.आपको बधाई.

    deepak pande के द्वारा
    March 12, 2014

    DHANYAWAAD AADARNIYA SADGURU JEE

    deepak pande के द्वारा
    March 11, 2014

    dhanyawaad aadarniya yogi jee maa kavita par manthan ke liye dhanyawaad

March 10, 2014

सुन्दर व् सार्थक अभिव्यक्ति .बधाई

    deepak pande के द्वारा
    March 11, 2014

    धन्यवाद आदरणीय शालिनी जी माँ कविता पर प्रोत्साहन हेतु धन्यवाद

vaidya surenderpal के द्वारा
March 10, 2014

बहुत सुन्दर भावपूर्ण कविता।

    deepakbijnory के द्वारा
    March 10, 2014

    DHANYAWAAD AADARNIYA SURENDRA JEE MAA KAVITA KEE SAMIKSHA KE LIYE

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
March 10, 2014

माँ का प्यार अमूल्य,अतुलनीय, अद्वतीय एवं निस्वार्थ होता है ,आपकी छोटी सी कविता का हर शव्द माँ की याद से सरावोर है ,बहुत भाव पूर्ण रचना , सादर नमन

    deepakbijnory के द्वारा
    March 10, 2014

    BAHUT BAHUT DHANYAWAAD AADARNIYA NIRMALA JEE JO AAPNE MAA KE PRATI MERI SAMVEDNAON KO SAMJHA SADAR NAMAN

yamunapathak के द्वारा
March 10, 2014

माता पिता से बढकर कोई और रिश्ता नहीं हो सकता क्योंकि अन्य रिश्तों से पहचान भी माता ही कराती है बहुत ही भावपूर्ण पंक्तियाँ हैं दीपक जी साभार

    deepakbijnory के द्वारा
    March 10, 2014

    DHANYAWAAD AADARNIYA YAMUNA JEE KAVITA KE MANTHAN PAR SADAR DHANYAWAAD

kavita1980 के द्वारा
March 8, 2014

माॆं जब याद बन जाए उस पीडा को बखूबी व्यक्त किया है आपने  Permalink: http://kavita1980.jagranjunction.com/2014/03/08/सशक्त-महिला-मेरी-नज़र-एक-उद

    deepakbijnory के द्वारा
    March 10, 2014

    DHANYAWAAD AADARNIYA KAVITA JEE MAA KO SARAHNE KE LIYE


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