CHINTAN JAROORI HAI

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कुमाऊं की होली (कांटेस्ट)

Posted On: 12 Mar, 2014 Junction Forum,Contest,Special Days में

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कुमाऊं की पहाडिओं पर होने वाली होली की शुरुआत बसंत पंचमी से ही होजाती है इस दिन होली के दिन धारण करने वाले वस्त्रों में रंग डाला जाता है तथा इसी दिन से विभिन्न घरों में होली की बैठक होने लगती हैं इनमे अधिकांश महिलाओं की बैठक होती हैं जिनमे गणेश जी की वंदना से आरम्भ करके राधा कृष्णा और शिव पारवती से सम्बंधित गीत गए जाते हैं पहाड़ों में यह सिलसिला पूरे एक माह तक चलता है चूंकि पहाड़ों में आवाज प्रतिध्वनि द्वारा गूंजती है तो फाल्गुन के इस पूरे महीने कुमाऊं इन्ही होली के गीतों से गुंजायमान रहता है
बिरज में होली कैसे खेलूंगी में संवारिए के संग
अबीर उड़ता गुलाल उड़ता उड़ते सातों रंग सखीरी
उड़ते सातों रंग
कान्हा जी की बांसुरी बाजे राधा जी के संग
बिराज में …………………………………………
इसी प्रकार शिवजी से सम्बंधित होली
होली खेलत पशुपतिनाथ
नगर नेपाला में
वृंदावन में कान्हा होली खेलें
राधा जी के साथ
शिव पारवती के साथ
नगर नेपाला में
इसी प्रकार कृष्णा के भजन से पूरा अल्मोरा नैनीताल गूंजता है फाल्गुन के पूरे महीने ये स्त्रीयां गुलाल से सराबोर हर गली मौहल्ले में नजर आती हैं होली में देवर भाभी का टीका भी बड़ा ख़ास होता है इस दिन देवर भाभी के साथ होली खेल उनके वस्त्रों को रंग से सराबोर करता है और दो दिन बाद भाभी को नयी साडी प्रदान करता है
इनका परंपरा के साथ साथ बड़ा व्यवहारिक महत्व भी है विभिन्न स्त्रीयां जिनका टैलेंट बहार न निकलने पर छिपा रहता है यहाँ ढोलकी की थाप पर नृत्य करके वह अपना टैलेंट प्रस्तुत करती है और मजे की बात यह है की अधिकतर कन्याओं का विवाह इसी मंडली में नवयौवना कन्याओं को देखकर बुजुर्ग महिलाओं द्वारा तय कर दिया जाता है और त्यौहार के बहाने एक सामाजिक सामंजस्य भी बना रहता है
दिन में महिलाओं की होली होती है तो रात में पुरुषों की कड़ी होली का भी अलग ही आनंद होता है ये सब कृष्णा और राधा के भजन शाश्त्रीय संगीत के रूप में बंदगी के अंदाज में तबला सितार हारमोनियम के साथ गाते हैं यदि सामान बंध जाता है तो यह होली पूरी रात चलती है समय समय पर इन होली के मतवालों को आलू के गुटके तथा चटनी चाय के साथ पेश किये जाते हैं
आज की आधुनिकता ने इस होली में नया रंग भर दिया है जिस नयी पीड़ी को यह गीत नहीं आते वो अपने म्यूजिक सिस्टम में यह होली रिकॉर्ड करके बजाकर आनंद लेता है अब तो यह गीत विभिन्न इंटरनेट माध्यमों से भी डाउनलोड किये जा सकते हैं हालाँकि समय के साथ कुछ कुरीतियां भी आ गया हैं जैसे अब मदिरा का सेवन भी होने लगा है परन्तु यह बहुत ही कम है आज भी पहाड़ का यह समाज अपनी होली की सांस्कृतिक धरोहर को सम्भाले हुए है
होली के इस रंगारंग कार्यक्रम में महिलाएं स्वांग रचती हैं स्वांग का अर्थ है वह आने मनपसंद किरदार का रूप धर कर अभिनय करती हैं कोई कृष्णा राधा बनकर भी होली का सजीव चित्रण करती हैं इससे मिलाओं में बसी अभिनय की प्रतिभा भी उजागर होती है यदि कोई महाशय इसमें ज्यादा जानकारी रखता हो तो कमेंट के माध्यम से लिख सकता है मैंने तो एक छोटा सा प्रयास भर किया है



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12 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sadguruji के द्वारा
May 3, 2014

बहुत बहुत बधाई ! नई रचना की प्रतीक्षा है !

    deepak pande के द्वारा
    May 3, 2014

    dhanyawaad aadarniya sadguru jee rachna kee sarahna ke liye

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
April 24, 2014

हार्दिक बधाई ,आपका आलेख वास्तव में गागर में सागर है दीपक भाई .

    deepak pande के द्वारा
    April 24, 2014

    dhanyawaad aadarniya nirmala jee ye sab aapka hee margdarshan aur sahyog hai apne bhai ke liye

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
March 15, 2014

पहाड़ों की सुरम्य वादिओं में इतनी  सुंदर ,सुरमय ,भक्तिमय एवं सभ्य होली मनाइ जाती है पढ़ कर अच्छा लगा,होली का भंग से भी नाम जुडा रहता है लगता है वहां उसका चलन नहीं होगा .बहुत सुंदर वर्णन , सादर बधाई दीपकजी

Madan Mohan saxena के द्वारा
March 13, 2014

सुन्दर सार्थक रचना ,होली की अग्रिम शुभकामना आभार मदन कभी इधर भी पधारें

    deepak pande के द्वारा
    March 13, 2014

    dhanyawaad madan jee aapki kai rachnaon par comment kiye magar pata nahee kyon dikhai nahee de rahe hain

    deepak pande के द्वारा
    March 13, 2014

    madan mohan jee aapke blog par mere comment paste nahee ho pa rahe hain

rameshbajpai के द्वारा
March 13, 2014

प्रिय श्री पाण्डेय जी मंच पर आपके इस रचना शतक पर बधाई |कुमायु की होली का सार्थक चित्रण | शुभ कामना सहित

    deepak pande के द्वारा
    March 13, 2014

    dhanyawad aadarniya raesh jee blog me aane ke liye shukriya isi prakar aasheerwad banaye rakhiyega

March 12, 2014

बहुत सुन्दर भावनात्मक प्रस्तुति .बधाई

    deepak pande के द्वारा
    March 13, 2014

    dhanyawaad aaadarniya shalini jee


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