CHINTAN JAROORI HAI

जीवन का संगीत

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खातिर चमन के ज़हन में चिंतन जरूरी है (कांटेस्ट )

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षड़यंत्र का चिड़ियाँ स्वयं ही
जाल जब बुनने लगें
बहेलियों को हर बार अपना
रहनुमां चुनने लगें
चिड़ियों से कह दो अब
आत्ममंथन जरूरी है
खातिर चमन के ज़हन में
चिंतन जरूरी है
………………………………
बाढ़ जब बढ़ के स्वयं ही
खेत को खाने लगे
सिंह भी जब बिल्लियों के
आगे मिमियाने लगे
कह दो सभी जीव जंतुओं से
शक्ति प्रदर्शन जरूरी है
खातिर चमन के ज़हन में
चिंतन जरूरी है
…………………………………
पुष्प का रस ले भ्रमर जब
दूजे चमन जाने लगे
बागबां बन मूकदर्शक
गाना वही गाने लगे
तितलियों से कह दो
अब भवरों का उन
तर्पण जरूरी है
खातिर चमन के ज़हन में
चिंतन जरूरी है
…………………………….
नगर में जब द्रोपदी की
आबरू लूटने लगे
भीष्म भी दरबार में जब
टेकने घुटने लगे
कृष्ण का जन जन में तब
अवतरण जरुरी है
खातिर चमन के ज़हन में
चिंतन जरूरी है

दीपक पाण्डेय नैनीताल



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9 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

deepak pande के द्वारा
April 21, 2014

kavita ke mukhyansh dainik jagran me prastut karne ke liye jagran parivar ka sadar dhanyawaad

DR. SHIKHA KAUSHIK के द्वारा
April 17, 2014

sarthak lekhan hetu badhai

    deepak pande के द्वारा
    April 21, 2014

    dhanyawaad aadarniya sikha jee

sadguruji के द्वारा
April 17, 2014

षड़यंत्र का चिड़ियाँ स्वयं ही जाल जब बुनने लगें बहेलियों को हर बार अपना रहनुमां चुनने लगें चिड़ियों से कह दो अब आत्ममंथन जरूरी है खातिर चमन के ज़हन में चिंतन जरूरी है.बहुत अच्छी कविता.आपको बधाई.जनता अपने को भ्रस्ट होने से बचाये.गलत लोगों को अपना रहनुमा न चुने,नहीं तो वो बहुत पछताएगी और महंगाई व् भ्रस्टाचार का दंश यूँ ही झेलती रहेगी.

    deepak pande के द्वारा
    April 21, 2014

    UMMEED HAI SADGURU JEE ABKEE KUCHH BADLAW AAYEGA

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
April 17, 2014

कृष्ण का जन जन में तब अवतरण जरूरी है ,बहुत उम्दा दीपक भाई ,सु सामयिक चेतावनी जन साधारण के लिए ,आभार .

    deepak pande के द्वारा
    April 21, 2014

    धन्यवाद आदरणीय निर्मला जी बस आपका प्रोत्साहन बना रहना चाहिए अपने इस भाई के लिए

sanjay kumar garg के द्वारा
April 17, 2014

“नगर में जब द्रोपदी की आबरू लूटने लगे भीष्म भी दरबार में जब टेकने घुटने लगे कृष्ण का जन जन में तब अवतरण जरुरी है” बहुत सुन्दर! आदरणीय दीपक जी, सुन्दर अभिव्यक्ति के लिए बधाई!

    deepak pande के द्वारा
    April 21, 2014

    DHANYAWAD AADARNIYA SANJAY GARG JEE KRISHNA KA AWTARAN TO AWASHYAK HO HEE GAYA HAI AB


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