CHINTAN JAROORI HAI

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मेरी माँ(कविता)

Posted On: 9 May, 2014 कविता,Junction Forum,Special Days में

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आज जब बेटा मेरा पाठशाला से आया
माँ को तुरंत माँ दिवस पे प्रपत्र थमाया
ये देख अपनी माँ का मुझे ख्याल है आया
सारी उम्र जो संघर्ष करती ही रही
दुश्वारियों से सदा जो लड़ती ही रही
अब तक अपनी माँ को समझ पाया ही नहीं
ज़हन में ये ख्याल कभी आया ही नहीं
…………………………………………….
लेने सब्ज़ी जब भी अम्मा जाती थी बाजार
आँखों में उन चार बच्चों के होता था इंतज़ार
वो चार आने की नमकीन भी होता था त्यौहार
माँ की थकान से किसी को भी न था सरोकार
माँ तुमने अपने आप कुछ भी खाया या नहीं
ज़हन में ये ख्याल कभी आया ही नहीं
…………………………………………….
जब सुबह के वक़्त बनते थे परांठे
दो ही महज़ हर एक के हिस्से में आते
तीसरा परांठा उन्हें क्यूँ नहीं मिला
शिकवा यही रहा सदा रहा यही गिला
माँ तूने एक भी परांठा खाया या नहीं
ज़हन में ये ख्याल कभी आया ही नहीं
…………………………………………….
समय गुज़रा धीरे धीरे बच्चे बड़े हुए
शिक्षा के भी कुछ नए स्तम्भ खड़े हुए
चक्र चला विकास का ज्यों ज्यों समय कटा
त्यों त्यों माँ के शरीर से गहना भी घटा
अपने श्रृंगार को माँ तूने कुछ बचाया या नहीं
ज़हन में ये ख्याल कभी आया ही नहीं
…………………………………………….
खुश हो जाती माँ जब भी राखी के दिन आते
उन दिनों वो बच्चे कुछ ज्यादा ही पाते
अपनी खातिर माँ ने कभी किया नहीं चर्चा
भाई से मिले धन को भी बच्चों पर ही खर्चा
अपने लिए माँ तूने कुछ बचाया या नहीं
ज़हन में ये ख्याल कभी आया ही नहीं
…………………………………………….
राशन की दूकान से वो गेंहूँ का लाना
काँधे पे रख लेजा उसे चक्की पे पिसाना
मुनिस्पलिटी के नल से वो पानी का लाना
जरूरत से ज्यादा वो अपने तन को जलाना
बच्चों को मदद को कभी बुलाया या नहीं
ज़हन में ये ख्याल कभी आया ही नहीं
…………………………………………….
माँ तकदीर तेरी तुझसे सदा रुष्ट ही रही
फिर भी न जाने क्यूँ, तू संतुष्ट ही रही
धीरे धीरे जब ग़मों की धुंध छंट गयी
बदल गया समय मुफलिसी भी हट गयी
न जाने अपने ही आप में गुमशुदा तू हो गयी
समय से पहले ही इस जहां से विदा तू हो गयी
तुझको न दे सका कोई , कुछ तूने पाया ही नहीं
ज़हन में ये ख्याल कभी आया ही नहीं
…………………………………………….
अपने में रही गुमसुम कुछ भी न कहा
एक रोज़ गरम मोज़े बेटे को लाने को कहा
सोचा था बड़े होकर वो सब कुछ दिलाएगा
माँ ही चले गयी अब ये किसको बताएगा
सुख सारे तुझको देने का उसको जूनून था
बस मोज़े ही दे पाया ये ही सुकून था
कोई तेरे लिए कुछ भी कर पाया ही नहीं
ज़हन में ये ख्याल कभी आया ही नहीं
…………………………………………….
दीपक पाण्डेय
जवाहर नवोदय विद्यालय
नैनीताल



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20 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sadguruji के द्वारा
May 13, 2014

सारी उम्र जो संघर्ष करती ही रही दुश्वारियों से सदा जो लड़ती ही रही अब तक अपनी माँ को समझ पाया ही नहीं ज़हन में ये ख्याल कभी आया ही नहीं.बहुत अच्छी रचना.बहुत बहुत बधाई.

    deepak pande के द्वारा
    May 14, 2014

    dhanyawaad aadarniya sadgurujee माँ के बारे में तो जितना लिखो काम ही है

Sushma Gupta के द्वारा
May 11, 2014

दीपक जी, माँ के त्याग की यह अनमोल है रचना ,जिसे मैंने आजतक पाया ही नहीं … शुभकामनाओं सहित..

    deepak pande के द्वारा
    May 12, 2014

    dhanyawaad aadarniya sushma jee hausla badane ke liye aapne ye shabd mere liye prerna bane rahenge blog me padarpan hetu sadar dhanyawaad

alkargupta1 के द्वारा
May 11, 2014

बहुत ही बढ़िया दिल की गहराइयों तक पहुँचने वाली रचना के लिए बधाई

    deepak pande के द्वारा
    May 12, 2014

    aadarniya alka jee yadi meri kavita kisi ek ke bhee dil kee gehraiyon tak pahoonchee to mera yah kavita likhna safal siddh hua blog par aagman hetu sadar dhanyawaad

jlsingh के द्वारा
May 10, 2014

बहुत ही सुन्दर कविता और संस्मरण माँ की तन्हाई में घुटता और याद आती माँ की सादर! दीपक पण्डे जी!

    deepak pande के द्वारा
    May 11, 2014

    dhanyawaad aadarniya jawahar jee kavita par manthan hetu dhanyawaad

दिल से लिखी दिल को छूती बहुत ही सुन्दर भावभिव्यक्ति..सादर..

    deepak pande के द्वारा
    May 11, 2014

    DHANYAWAAD AADARNIYA SHILPA JEE MAIN DHANYA HUA यदि मेरी रचना किसी के दिल में माँ के प्रति संवेदना जगा सकी ब्लॉग में आने हेतु धन्यवाद

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
May 10, 2014

बहुत सुन्दर और प्यारी रचना ..माँ का ख्याल काश लोग करते रहें उस के सा बलिदानी प्रेमी ममता लुटाने वाला और कहाँ …यादगार लम्हे भ्रमर ५

    deepak pande के द्वारा
    May 10, 2014

    dhanyawaad aadarniya surendra jee maa ke prati bhawnaen vyakt karne ke liye apka mere blog me aagman mere liye prerna ka srot hai

ranjanagupta के द्वारा
May 9, 2014

दीपक जी बहुत ,बहुत बधाई इतना सवेदन इतनी पीड़ा और पश्चाताप पर माँ तो लौट कर नही आती आपका दुःख और आपके शब्द मेरे भी है और बहुत सारे लोंगों के भी माँ के लिए यही शब्द व यही पीड़ा और ऐसा ही पश्चाताप भी होगा !सादर !!

    deepak pande के द्वारा
    May 10, 2014

    dhanyawaad aadarniya ranjana jee jo aap meri samvednaen aur bhawvaen samajh payee apka commenre liye protsahan ke samaan hai

nishamittal के द्वारा
May 9, 2014

भावपूर्ण माँ को समर्पित सुन्दर रचना दीपक जी

    deepak pande के द्वारा
    May 9, 2014

    BLOG ME AANE TATHA KAVITA PAR MANTHAN HETU DHANYAWAAD AADARNIYA NISHA JEE

kavita1980 के द्वारा
May 9, 2014

आपके लेखन से भी अधिक आपकी भावनाएँ छू जाती हैं किसी अपने की जरूरतों में उसके कष्टों में शामिल न हो पाना और उसके क्कुछ काम न आ पाने का अhsaas बेहद पीड़ादायक होता है   पर शायद इन भावनाओं की ज़रूरत अब भी किसी मा को हो –

    deepak pande के द्वारा
    May 9, 2014

    SAHEE FARMAAYA AADARNIY KAVITA JEE AB KOSHISH HOGI KI KISI AUR MAA KO KUCHH AARAAM AUR SUKH DE SAKOO MERE APNE BACHCHE KEE MAA YA BACHCHE KEE MAA KEE BHEE MAA

    kavita1980 के द्वारा
    May 12, 2014

    बच्चे की माँ के लिए कुछ करना आपका नैतिक दायित्व बनता है किसी और रूप में ;मगर माँ के लिए कुछ न कर पाने का संताप तो किसी माँ सदृश नारी, किसी असहाय वृदधा (आवश्यक नही की वो आपकी कुछ लगती हो )कि मदद कर के ही हल्का हो सकता है। विश्वास करें इस से आप को जो सुकून मिलेगा वो और किसी भी चीज से नही  आपकी पीड़ा आपकी रचनाओं में झलकती है –बड़ा भाई मान कर सलाह दे रही हूँ  असहज लगे तो इंगित कर दें कृपया अन्यथा न लें –

    deepak pande के द्वारा
    May 12, 2014

    dhanyawaad aadarniya kavita jee aap kee salah sir aankhon par ye maa ka aasheerwad hee to hai kee is internet kee bhawnaviheen duniya me bhee mujhe ek aap jaisi bahan mil gayee jo ek bhai ko samay samay par uchit rai pradan kartee hai


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