CHINTAN JAROORI HAI

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छत में ही सही एक नया चमन बसाएंगे (पर्यावरण दिवस पर विशेष)

Posted On: 5 Jun, 2014 Others,कविता,Junction Forum में

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माना कि इस धरा में वृक्षों की कमी है
हर ओर कंक्रीट से पटी ये जमीं है
प्रदुषण से हर एक की साँस थमी है
वातावरण में भी शुद्ध वायु की कमी है
परिस्थिति से यूं ही न हम हार जायेंगे
छत में ही सही एक नया चमन बसाएंगे
…………………………………………….
चारदीवारी में ही गमलों की कतार हो
खिलते हुए फूलों की उसमे बहार हो
पुष्प पर मंडराते भंवरों का खेल हो
दीवारों पर नृत्य करती नवीन बेल हो
हर एक घर में फिर से तुलसी सजायेंगे
छत में ही सही एक नया चमन बसाएंगे
…………………………………………….
लैंप पोस्ट पर ही कुछ डब्बे सजे हों
पक्षियों के जिनमें नए घरोंदे बने हों
बर्फ के मैदान में भी पॉली हाउस बने हों
भीतर उनके सब्जियों के बागान सजे हों
ड्रिप इरिगेशन से मरू में खेत लहलहाएंगे
छत में ही सही एक नया चमन बसाएंगे
…………………………………………….
हर किसी के घर में होगा नया सवेरा
विकल्प सौर ऊर्जा का मिटाएगा अँधेरा
इस जहाँ से पॉलिथीन की हस्ती मिटेगी
हर घर में जैविक कूड़े से कम्पोस्ट बनेगी
सड़क के दोनों ओर नए वृक्ष लगाएंगे
छत में ही सही एक नया चमन बसाएंगे
…………………………………………….
जल नदी का बहेगा अपने ही वेग से
रोके नहीं रुकेगा बांधों के उद्वेग से
कारखानों के लिए नया कानून बनेगा
जो करेगा जल दूषित वही शोधन भी करेगा
अब और नदियों को न प्रदूषित बनाएंगे
छत में ही सही एक नया चमन बसाएंगे
…………………………………………….
अब किसी घर से व्यर्थ पानी न बहेगा
एक सोकपिट टैंक हर घर में बनेगा
सारा जल उसी से जमीं में रिसेगा
भू जल का भी कुछ स्तर बढ़ेगा
सबको जल की खेती का पाठ पढ़ाएंगे
छत में ही सही एक नया चमन बसाएंगे
…………………………………………….

दीपक पाण्डेय
नैनीताल



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18 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Sushma Gupta के द्वारा
June 13, 2014

‘छत में ही सही एक नया घर बसाएंगे ‘ एक जागरूकता भरी प्रेरक रचना है , बहुत वधाई दीपक जी..

    deepak pande के द्वारा
    June 14, 2014

    dhanyawaad aadarniya sushma jee blog me aakar kavita par manthan ke liye

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
June 13, 2014

पढ़ने में विलम्ब हुआ इसका खेद है ,इस कविता की बहुत बड़ी विशेषता यह है कि पूरी कविता में पर्यावरण की समस्या या उसकी की शिकायत के स्थान पर बहुत सुंदर सुझाव दिए गए हैं जो आपकी सकारात्मक बुद्धिकौशल के परिचायक हैं,बहुत ही अच्छी कविता दीपकभाई ,बधाई आपको .

    deepak pande के द्वारा
    June 11, 2014

    dhanyawaad aadarniya yogi jee jo aapne kavita me likhi meri bhawvaon ko samjha blog me manthan hetu apna bahumulya samay nikalne ke liye sadar aabhaar

sanjay kumar garg के द्वारा
June 10, 2014

सुन्दर रचना आपने को छत पर सुन्दर बगीचा बना दिया, काश सब ऐसे ही पेड़-पौधों का संरछण करें ! सुन्दर रचना के लिए बधाई आदरणीय दीपक जी!

    deepak pande के द्वारा
    June 11, 2014

    dhanyawaad aadarniya sanjay jee apka kavita par manthan mere liye protsahan ka vishay hai sadar aabhaar

jlsingh के द्वारा
June 6, 2014

बहुत सुन्दर रचना और भाव आदरणीय श्री दीपक पाण्डे जी, आपने तो नैनीताल को मंच पर स्थापित कर दिया …हर पंक्ति प्रेरित करती है और रचना के दृश्टिकोण से भी बहुत सुन्दर!

    deepak pande के द्वारा
    June 7, 2014

    धन्यवाद आदरणीय जवाहर जी ये सब आपका बड़प्पन है नैनीताल के जिक्र हेतु धन्यवाद या नैनीताल की वादियां ही हैं जो लिखने को प्रेरित करती हैं

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
June 6, 2014

चारदीवारी में ही गमलों की कतार हो खिलते हुए फूलों की उसमे बहार हो पुष्प पर मंडराते भंवरों का खेल हो दीवारों पर नृत्य करती नवीन बेल हो हर एक घर में फिर से तुलसी सजायेंगे छत में ही सही एक नया चमन बसाएंगे बहुत सुन्दर काश ये सब मनोकामनाएं हम सब की शीघ्र पूर्ण हों आइये धरती और पर्यावरण को बचाएं भ्रमर ५

    deepak pande के द्वारा
    June 6, 2014

    dhanyawaad aadarniya bhramar jee saadar aabhaar

DR. SHIKHA KAUSHIK के द्वारा
June 6, 2014

sarthak sandesh prasarit karti rachna hetu aabhar

    deepak pande के द्वारा
    June 6, 2014

    DHANYAWAAD AADARNIYA SHIKSHA JEE KAVITA PAR MANTHAN HETU SADAR AABHAAR

Shobha के द्वारा
June 6, 2014

आपने बहूत अच्छी कविता लिखी है इसमे एक बात और जोड़ दीजियेगा विशाल वृक्ष को छोटा कर अर्थात बोनसाई बना कर बैठक में नही सजायेंगे ज्ञानवर्धक कविता जिसमें सब कुछ है डॉ शोभा भारद्वाज

    deepak pande के द्वारा
    June 6, 2014

    aadarniya Dr shobha jee bonsai vichar me to thee magar lay na banane kee vajah se is baat ka jikra nahee kar paaya blog me aane hetu sadar aabhaar

nishamittal के द्वारा
June 6, 2014

सुन्दर सोच ,और भी है राहें को दर्शाती

    deepak pande के द्वारा
    June 6, 2014

    dhanyawaad aadarniya nisha jee jo apne meri soch ko samman diya sadar aabhaar


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