CHINTAN JAROORI HAI

जीवन का संगीत

166 Posts

979 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 14778 postid : 753753

घर है अगर चमन तो पिता है बागबां(पितृ दिवस पर)

Posted On: 13 Jun, 2014 Others,कविता,Junction Forum,Special Days में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

परिवार की इकाई का वो ही है रहनुमां
घर है अगर चमन तो पिता है बागबां
…………………………………………..
माँ है गर वात्सल्य तो चट्टान है पिता
माँ है आशियाँ तो निगेहबान है पिता
माँ है एक तपस्या तो वरदान है पिता
माँ है अगर जमीन पिता है आसमाँ
घर है अगर चमन तो पिता है बागबां
…………………………………………..
साया है पिता का तो किसी का न भय है
जीवन के इस संगीत की अलग ही लय है
हर लम्हा हर एक दिन आनंद से मय है
हँसता हंसाता चलता है जीवन का कारवां
घर है अगर चमन तो पिता है बागबां
…………………………………………..
पिता जो है साथ सभी सपने सलोने हैं
मेले में मौजूद सारे ही अपने खिलोने हैं
दुःख और तकलीफ सब लगते बौने हैं
मुसीबत का हर बड़ के करता है सामना
घर है अगर चमन तो पिता है बागबां
…………………………………………..
जन्म देती है माँ तो पिता है संभालता
खुद का पेट काट के बच्चों को पालता
जीवन की दुश्वारियों से वो ही निकालता
हर पल सुनहरे कल की करता है कामना
घर है अगर चमन तो पिता है बागबां
…………………………………………..
खुद बन के घोडा पीठ पे बैठाता है पिता
संतान की खातिर तन जलाता है पिता
जीवन के मूल्यों का पाठ पढाता है पिता
बिठा के काँधे पर दुनिया दिखाता है पिता
एक एक ईंट पत्थर जोड़ बनाता है घरोंदा
घर है अगर चमन तो पिता है बागबां
…………………………………………..
बच्चों के सुनहरे भविष्य का आगाज़ पिता है
सपनों के उनके पंखों की परवाज़ पिता है
परिवार है एक संगीत उसका साज़ पिता है
समय की रेत पर बनाता चलता है निशाँ
घर है अगर चमन तो पिता है बागबां
…………………………………………..
अपने सुख की खातिर जी पाता ही कहाँ है
अपने जख्मों को स्वयं सी पाता ही कहाँ है
जज़्बातों को अपने दिखा पता ही कहाँ है
ये वो रिश्ता है जिसमे न हैं कोई खामियां
घर है अगर चमन तो पिता है बागबां
…………………………………………..
दुनिया में अनमोल है खुदा की ये नैमत
संसार में बहुमूल्य है इन्सां की ये दौलत
आता समझ दुनिया से जब होता है रुखसत
तब बनता है इस रिश्ते से यादों का आशियाँ
घर है अगर चमन तो पिता है बागबां
…………………………………………..
ज़हन में इसी बात का एहसास किया है
इस रिश्ते को समझने का कयास किया है
सभी के आत्ममंथन का प्रयास किया है
लिख देती है लेखनी न कहता हूँ ख्वामखां
घर है अगर चमन तो पिता है बागबां
…………………………………………..

दीपक पाण्डेय
जवाहर नवोदय विद्यालय
नैनीताल



Tags:       

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (4 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

19 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shobha के द्वारा
June 21, 2014

आपने पिता पर बहूत ही सुन्दर रचना की है मुझे इस बात का बहूत दुख है मेरी नजर में यह देर से चढ़ी बच्चे के सुनहरे भविष्य का आगाज है पिता हे बच्चे के जिस दिन समझ आ जाएगा पापा की डाट भी अच्छी लगेगी शोभा

    deepak pande के द्वारा
    June 28, 2014

    dhanyawaad aadarniya shobha jee kavita kee sarahna ke liye

Veer Suryavanshi के द्वारा
June 16, 2014

दीपक जी !! पहली बार आपकी कविता पड़ने का अवसर प्राप्त हुआ और मुझे आपकी रचना बहुत अच्छी लगी ” घर है अगर चमन तो पिता है बागबां” बहुत प्रभावशाली व् मर्मस्पर्शी कविता है आपको बधाई देते हुए अनुरोध करूंगा की कृपया एक बार अपना कीमती वक़्त इधर भी दे – http://veersuryavanshi.jagranjunction.com/2014/06/12/%e0%a4%a4%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a4%be/?preview=true&preview_id=753722&preview_nonce=73f030ef02

    deepak pande के द्वारा
    June 16, 2014

    dhanyawwaad aadarniya suryavanshi jee

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
June 16, 2014

बच्चों के सुनहरे भविष्य का आगाज़ पिता है सपनों के उनके पंखों की परवाज़ पिता है परिवार है एक संगीत उसका साज़ पिता है समय की रेत पर बनाता चलता है निशाँ घर है अगर चमन तो पिता है बागबां,पिता के समर्पण को शब्दों में पिरो दिया आदरणीय दीपकजी ,बहुत उम्दा रचना ,बधाई .

    deepak pande के द्वारा
    June 16, 2014

    DHANYAWAAD AADARNIYA NIRMALA JEE SAADAR AABHAAR

    deepak pande के द्वारा
    June 16, 2014

    KAVITA PAR MANTHAN KE LIYE SADAR AABHAAR ADARNIYA YOGI JEE

deepak pande के द्वारा
June 15, 2014

kavita के मुख्यांश दैनिक जागरण में प्रकाशित करने के लिए जागरण परिवार संपादक महोदय का तहे दिल से शुक्रिया

DR. SHIKHA KAUSHIK के द्वारा
June 14, 2014

बहुत सुन्दर भावों से युक्त पिता को समर्पित रचना हेतु हार्दिक आभार

    deepak pande के द्वारा
    June 15, 2014

    dhanyawaad aadarniya shikha jee

nishamittal के द्वारा
June 14, 2014

बधाई सुन्दर भावपूर्ण पोस्ट

    deepak pande के द्वारा
    June 14, 2014

    dhanyawaad aadarniya nisha jee

pkdubey के द्वारा
June 14, 2014

बहुत अद्भुत रचना सर.

    deepak pande के द्वारा
    June 14, 2014

    danyawaad aadarniya dubey jee

sadguruji के द्वारा
June 14, 2014

माँ है गर वात्सल्य तो चट्टान है पिता माँ है आशियाँ तो निगेहबान है पिता माँ है एक तपस्या तो वरदान है पिता माँ है अगर जमीन पिता है आसमाँ घर है अगर चमन तो पिता है बागबां.बहुत प्रेरक और भावपूर्ण रचना ! बहुत बहुत बधाई !

    deepak pande के द्वारा
    June 14, 2014

    dhanyawaad blog me padharne ke liye aadarniya sadguru jee

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
June 13, 2014

पिता को प्रतिष्ठित करती एक बेहतरीन उम्दा काव्यात्मक प्रस्तुति ! पाण्डे जी बधाई ! सादर !

    deepak pande के द्वारा
    June 13, 2014

    dhanyawaad aadarniya vijay jee apka mere blog par manthan mere liye sabse bada protsahan hai


topic of the week



latest from jagran