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अनोखी भीख (लघु कथा)

Posted On: 29 Jun, 2014 कविता,Junction Forum,Hindi Sahitya में

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देहरादून रेलवे स्टेशन का एक प्लेटफार्म देहरादून से काठगोदाम को जाने वाली रेलगाड़ी अपने नियत स्थान पर खड़ी थी चूंकि अभी काफी समय शेष था अतः ए.सी. टू टियर डब्बे का दरवाजा अभी नहीं खुला था अपना एक से छह तक की सीट पर नाम देख आश्वस्त होकर वो छह भद्रा पुरुष दरवाजे के ही पास खड़े हो गए तभी एक लगभग ७५ वर्षीय वृद्धा का आगमन हुआ फटे मैले कुचले कपडे ,दो दिन से कुछ न खाए जाने की दुहाई देकर वह किसी आस में हाथ फैलाने लगी मगर उनमे से किसी ने उस पर दया किये बिना उसे आगे बढ़ जाने को कहा तथा आपस में कहने लगे दान देने से इन लोगों को और बढ़ावा मिलता है मेहनत के बिना किसी को भी एक रुपया भी नहीं देना चाहिए
थोड़ी देर बाद दरवाजा खुला वो सभी भद्रा पुरुष अपनी अपनी सीट पर बैठ गए टी टी का आगमन हुआ रेल का किराया बढ़ने की वजह से सभी की अतिरिक्त ९५ रूपये की रसीद कटी प्रत्येक ने टी टी को १०० रूपये थमा दिए रसीद काटकर टी टी उन सभी से हाथ मिलाते हुए थैंक्यू कहने लगा तथा आगे बढ़ गया वे सभी टी टी का ये थैंक्यू सुनकर अपने आप को गौरवान्वित महसूस कर रहे थे पांच रूपये वापस मांगने की किसी ने भी ज़हमत तक नहीं उठाई आखिर अधिकार के रूप में ली जाने वाली ये अनोखी भीख ही तो थी

दीपक पाण्डेय
जवाहर नवोदय विद्यालय
नैनीताल



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8 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

pkdubey के द्वारा
July 7, 2014

सर ,बहुत अच्छी लघु कथा.११ वी की क्लास में हमारी फीस ४१८ रुपये थी.मैंने चेंज ४१८ रुपये अपने क्लास टीचर को दिए,तो साहब तिलमिलाकर लाल -पीले हो गए.हमारा ईमान यही से दिखना शुरू होता है.

    deepak pande के द्वारा
    July 7, 2014

    HAMARI TEESRI ME FEES 36 PAISE THEE MADAM VAPAS KARNE HETU 2 PAISE KE SIKKON KEE JHOLEE LATI THEE TAB WO GURU AAJ BHEE HAMRE LIYE ROLE MODEL HAIN

बहुत ही सटीक सार्थक प्रस्तुति  आदरणीय दीपक जी सादर..

    deepak pande के द्वारा
    July 1, 2014

    dhanyawaad aadarniya shilpaa jee maine to bas ek satya ghatna ka varnan kar diya aapka protsahan milaa iska aabhaari hoon

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
June 30, 2014

जी दीपक जी मन को छू जाने वाली कथा वो पांच रूपये हाथ मिलाने और थैंक यूं के ही थे अब जमाना यही है घर से लेकर बाहर तक पैसे का बोलबाला ..गलत तो है ही तीस वापस माँगने थे ..वैसे ऐसे भद्र पुरुष मांगते तो जरूर हैं करारा प्रहार व्यवस्था तथा सरकार पर भी भ्रमर ५

    deepak pande के द्वारा
    June 30, 2014

    dhanyawaad aadarniya bhramar jee prernadayak tippani ke liye aapka mere lekh par manthan mere liye bahut bada protsahan hai

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
June 29, 2014

ऐसे अनुभव लगभग हर व्यक्ति को हुए होंगे,आपकी लघु कथा सत्य को उदघाटित करती है,ये लोग पुरे अधिकार से बेलेंस के रूपय रख लेते हैं ,अनोखी भीख ही है आदरणीय दीपक जी .

    deepak pande के द्वारा
    June 30, 2014

    sadar dhanyawaad aadarniya nirmala jee


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