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जीवन का संगीत

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जीवन एक भ्रम ही था मौत लाज़मी रही (ग़ज़ल)

Posted On: 15 Jul, 2014 कविता,Junction Forum,Hindi News में

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इमारत बुलंद हो गयी बुनियाद में नमी रही
शौहरत ए मंज़िल मिली माँ की ही कमी रही
…………………………………………………..
भानु की ही ओट में छाँव तलाशता रहा
स्वप्न की किरण में वो रात शबनमी रही
…………………………………………….
आसमाँ की आस में परिन्दा उड़ता ही गया
न तो आसमाँ मिला न पैरों तले ज़मीं रही
………………………………………………..
जीवन की ज़द्दोज़हद में दौड़ता चला गया
आयी जब सांस तो सांस फिर थमी रही
…………………………………………..
एक दीप बुझ रहा तो दूजा टिमटिमा रहा
जिंदगी चलती रही जीवन की न कमी रही
………………………………………………..
जिंदगी की आस में मौत से लड़ता रहा
जीवन एक भ्रम ही था मौत लाज़मी रही

दीपक पाण्डेय
जवाहर नवोदय विद्यालय
नैनीताल



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22 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

    deepak pande के द्वारा
    July 22, 2014

    DHANYAWAAD AADARNIYA YOGI JEE MAI AAPKE SAMAAN BADA LEKHAK TO NAHEE PARANTU AAPKE MERE BLOG ME COMMENT PANE PAR EK ATMVISHWAS JAROOR AA JATA HAI KI SHAYAD MAINE KUCHH BEHTAR HEE LIKHA HAI SAADAR AABHAAR

jlsingh के द्वारा
July 19, 2014

वैसे तो हर पंक्ति लाजवाब है फिर भी मुझे जो ज्यादा पसंद आयी उसे मैंने यहाँ उद्धृत करना उचित समझा … एक दीप बुझ रहा तो दूजा टिमटिमा रहा जिंदगी चलती रही जीवन की न कमी रही यही तो जीवन है….लाजवाब गजल!

    deepak pande के द्वारा
    July 20, 2014

    aadarniya jawahar jee aapkee टिप्पणी से मैं खुश hoon क्यूकी आप जैसे उम्दा lekhak kee टिप्पणी ka arth hai ki meri gazal me kuch to achcha hai

anilkumar के द्वारा
July 18, 2014

आदरणीय दीपक जी जिन्दगी की हकीकत को बयां करती बेहतरीन गजल ।  बहुत बहुत बधाई ।

    deepak pande के द्वारा
    July 18, 2014

    aadarniya anil jee kavita par manthan ke liye bahut bahut dhanyawaad shayad ye hakikat sabhee kee jindagi me pesh aati samvedna se bhara vyakti samajh jaata hai jaise ki aapne comment kar diya

yamunapathak के द्वारा
July 18, 2014

बहुत उम्दा ग़ज़ल है दीपक जी

    deepak pande के द्वारा
    July 18, 2014

    dhanyawaad aadarniya yamuna jee is nacheez ka hausla badane ke liye saadar aabhaar

deepak pande के द्वारा
July 18, 2014

आदरणीय कविता जी ये सब माँ का आशीर्वाद ही है जो इतना लिख पा रहा आपने मेरी कविता में मेरे दर्द और भावनाओं को समझा इसका तहे दिल से शुक्रिया

kavita1980 के द्वारा
July 18, 2014

ऐसा होता है आदमी जिसके सुख के लिए जूझता रहता है सारे प्रयत्न करता है अक्सर मंज़िल तक पहुचने के पहले ही वो हाथ छूट जाते हैं जिसका मलाल ताउम्र रह जाता है –आपकी हर रचना में आपकी माँ का आशीर्वाद छुपा है वो आज भी आपके साथ हैं और आपकी उन्नति को देख आशीर्वाद दे रही हैं

    deepak pande के द्वारा
    July 18, 2014

    dhanyawaad aadarniya yogi jee bas jo mehsoos karta hoon wo hee likh deta hoon saadar aabhaar blog me aane hetu

sadguruji के द्वारा
July 18, 2014

एक दीप बुझ रहा तो दूजा टिमटिमा रहा जिंदगी चलती रही जीवन की न कमी रही ! बहुत सुन्दर जीवंत दर्शन ! आदरणीय दीपक पाण्डेय जी ! इस बेहतरीन रचना के लिए बहुत बहुत बधाई !

    deepak pande के द्वारा
    July 18, 2014

    dhanyawaad aadarniya sadguru jee

nishamittal के द्वारा
July 17, 2014

सुन्दर भावपूर्ण रचना

    deepak pande के द्वारा
    July 17, 2014

    dhanyawaad aadarniya nisha jee

sanjay kumar garg के द्वारा
July 16, 2014

जीवन की ज़द्दोज़हद में दौड़ता चला गया आयी जब सांस तो सांस फिर थमी रही. सुन्दर अभिव्यक्ति! आदरणीय दीपक जी!

    deepak pande के द्वारा
    July 17, 2014

    DHANYA WAD AADARNIYA SANJAY JEE AAPKA BLOG ME AANA HEE MERE LIYE PROTSAHAN KA SABAB HAI

pkdubey के द्वारा
July 16, 2014

बहुत गहन दार्शनिक विचार आदरणीय |सादर आभार और नमन |

    deepak pande के द्वारा
    July 17, 2014

    DHANYAWAAD AADARNIYA PARWEEN JEE SADAR AABHAAR

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
July 16, 2014

आसमाँ की आस में परिन्दा उड़ता ही गया न तो आसमाँ मिला न पैरों तले ज़मीं रही ……………………………………………….. दीपक भैया ह्रदय स्पर्शी सत्य,मन की गहराइयों से निकले शब्द ही आँखे भिगोने की क्षमता रखते हैं ,आज कई बार पढकर भी दिल नहीं भरा , उत्कृष्ट रचना ,हार्दिक अभिनन्दन .

    deepak pande के द्वारा
    July 17, 2014

    DHANYAWAAD BEHAN KE COMMENT KAA TO IS BHAI KO BAHUT BESABRI SE INTZAAR REHTA HAI YE SAB AAPKE HEE PRERNA AUR AASHEERWAAD HAI


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