CHINTAN JAROORI HAI

जीवन का संगीत

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ज़हन में खुदा का तब ही तो एहसास होता है

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घरौंदा छोड़कर परवाज़ को जाते हैं जब पंछी
नभ में अनंत विचरण का तब आभास होता है
…………………………………………………….
टूट कर जब शाख से मिल जाता है माटी में
दरख़्त बन दाना वही,चूमता आकाश होता है
…………………………………………………..
भूगर्भ की हलचल की उस पीड़ा को झेलकर
सागर था कभी जो अब वही कैलास होता है
…………………………………………………….
जो जाती है डूब तेल में दीपक के प्रेम में
जलती है जब खुद दूर तक प्रकाश होता है
…………………………………………………
जिस शाखा पर बैठा है उसी डाली को काटता
ठुकराने पर वही काव्य का कालिदास होता है
……………………………………………………
खुद को मिटाकर अहं को भी शून्य में रखकर
ज़हन में खुदा का तब ही तो एहसास होता है

दीपक पाण्डेय
जवाहर नवोदय विद्यालय
नैनीताल



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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
July 26, 2014

…………………….. खुद को मिटाकर अहं को भी शून्य में रखकर ज़हन में खुदा का तब ही तो एहसास होता है सच कहा दीपक जी जिस दिल में अहंकार होता है वहां ईश्वर का निवास नहीं होता ,,स्तरीय एवं सुंदर रचना .

    deepak pande के द्वारा
    July 27, 2014

    dhanyawaad aadarniya nirmala didi jahaan aap jaise bado kaa aasheerwaad ho wahaan ahm kaa sthaan hee kahaan hai vivekannd ne kaha tha yadee aapko jaraa bhee aham ho to sampoorn bhramand me apne astita kee kalpana kar lo shayad ek bidu ke barabar bhee nahee to bhir aham kaisa

sadguruji के द्वारा
July 25, 2014

खुद को मिटाकर अहं को भी शून्य में रखकर ज़हन में खुदा का तब ही तो एहसास होता है ! आदरणीय दीपक पाण्डेय जी ! सादर अभिनन्दन ! बहुत सार्थक और शिक्षाप्रद रचना ! बहुत बहुत बधाई !

    deepak pande के द्वारा
    July 25, 2014

    dhanyawaad aadarniya sadgrujee aap sabhee ka hausla badaate hain aapke hee lekh padkar manan karke likh deta hoon aabhaar

    deepak pande के द्वारा
    July 25, 2014

    rachna par gahan manthan ke liye saadar aabhaar aadarniya yogi jee bahumulya samay mere liye nikalne aur hausla badane ke liye dhanyawaad


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