CHINTAN JAROORI HAI

जीवन का संगीत

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मेरी पहली किताब

Posted On: 29 Jul, 2014 कविता में

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आदरणीय जागरण संपादक महोदय
mujhe aaj yah batate hue अत्यंत हर्ष की अनुभूति हो रही है की आपके तथा समस्त जागरण परिवार के द्वारा मिले सहयोग और प्रेरणा से मैंने एक पुस्तक का संपादन किया है आपके माध्यम से मई यह कहना चाहता हूँ की कविताओं की यह पुस्तक डाक के वी पी पी खर्च समेत मत्र१०० रुपये की है जो भी यह पूस्यक पाना चाहता है वह अपना पता कमेंट के रूप में लिख दे में उसे यह पुस्तक भेज दूंगा वी पी पी के द्वारा यदि कोई न भी लेना चाहता हो तो वह मेरे इस लिंक में पुष्कक की कैटऑन का आनंद ले सकता है
https://www.facebook.com/pages/%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%A8-%E0%A4%9C%E0%A4%B0%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%B9%E0%A5%88/1511803055716543?ref=hl&ref_type=बुकमार्क
अंत में मैं अपनी वाणी को यही एक अपनी कैट के साथ विराम देता हूँ

मेरा घर फिर मुझे पुकार रहा है
आज मेरी राह को निहार रहा है
मेरा उस घर में क्या किरदार रहा है?
बचपन मेरा उस मिट्टी में उधार रहा है
मेरा घर फिर मुझे पुकार रहा है
वो जमीँ अब जिसमें आम का दरख्त न रहा
अपनों के लिए अपनों के पास वक्त न रहा
अपनों के बीच आज कोई रब्त न रहा
रिश्ता वही आज सबको लगा गुहार रहा है
मेरा घर फिर मुझे पुकार रहा है
खेल का मैंदान छोटी सी गली में सिमट गया
पीछे बना एक झोपडा भी हट गया
न जाने कैसे एक विशाल वक्त कट गया
वो अतीत मेरा बचपन का जो गवाह रहा है
मेरा घर फिर मुझे पुकार रहा है

दीपक पाण्डेय
जवाहर नोदय विद्यालय
नैनीताल



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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

jlsingh के द्वारा
July 31, 2014

पुस्तक प्रकाशन के लिए बधाई आदरणीय श्री दीपक पाण्डे जी!

    deepak pande के द्वारा
    August 1, 2014

    dhanyawaad aadarniya jawahar jee aap hee logo ke sanidhya me likhna seekha hai saadar aabhaar

pkdubey के द्वारा
July 30, 2014

सादर आभार और बधाई आदरणीय | बहुत भावनात्मक और सत्य कविता | आप की पुस्तक का अवलोकन अवश्य करूंगा. आप सब से प्रेरणा लेकर,मैंने भी एक पुस्तक पब्लिश करवाने की कोशिश की है,शायद अगले माह तक यह शुभ समाचार मैं भी मंच पर शेयर करूंगा.

    deepak pande के द्वारा
    July 30, 2014

    dhanyawaad aadarniya praveen jee ishwar se prarthna karoonga ki aapkee pusyak jald hee hamare samne pradarshit ho

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
July 29, 2014

बहुत बहुत हार्दिक बधाई आदरणीय दीपक जी ,आपकी पुस्तक बहुत प्रसिद्दी पाए और लोक प्रिय हो .और होगी भी क्यों  कि आपकी रचनाओं में गहराई है ,मेरी हार्दिक शुभ कामनाएं .आपके मेल पर पता दूंगी तो अवश्य भेज दीजियेगा ,शुभ रात्रि .

    deepak pande के द्वारा
    July 30, 2014

    dhanyawaad aadarniya nirmala didi mujhe aapse isee protsahan kee asha thee saadar aabhaar


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