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नाज़ है इस देश पर ये मुल्क महान है(जागरण जंक्शन फोरम )

Posted On: 11 Aug, 2014 कविता,Junction Forum,Hindi News में

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वसुधैव कुटुंबकम की अनूठी पहचान है
नाज़ है इस देश पर ये मुल्क महान है
………………………………………….
एक समय था जब बाहर से गेंहू भी मंगाया
तत्पश्चात हरित क्रांति का अभियान चलाया
आज अपना अन्न उपजा स्वयं निर्वाह कर रहे
गोदाम अपने खाद्यान्न से स्वयं ही भर रहे
नारा दिया गया जय जवान जय किसान है
नाज़ है इस देश पर ये मुल्क महान है
………………………………………….
श्वेत क्रांति का जबसे मुल्क को मंत्र है मिला
हर जगह ही दूध की बहने लगी नदियां
तकनीकी के क्षेत्र में भी आगे आ गए हैं हम
सुपर कंप्यूटर बना कर उसे नाम दिया परम
विश्व की आर्थिक शक्तियों में अपना नाम है
नाज़ है इस देश पर ये मुल्क महान है
………………………………………….
शक्ति का अपने कभी अभिमान न किया
न मिला क्रायोजेनिक तो खुद ही बना लिया
अंतरिक्ष के भी क्षेत्र में बड़ा दिया कदम
अपना उपग्रह अब स्वयं ही भेजते हैं हम
पहले कभी भाभा थे तो अब कलाम है
नाज़ है इस देश पर ये मुल्क महान है
………………………………………….
खुद किसी भी मुल्क पर आक्रमण नहीं किया
सीमाओं का हमने कभी अतिक्रमण नहीं किया
बुरी नज़र दुश्मन की जब इस देश पर पडी
ईंट का जवाब हमने पत्थर से ही दिया
सेना में ही इस देश के बसते प्राण हैं
नाज़ है इस देश पर ये मुल्क महान है
………………………………………….
नारी की अस्मत पर जब प्रहार किया गया
जनता का सैलाब फिर सड़कों पे आ गया
एक क्रांति का फिर नया प्रादुर्भाव हुआ
जाग गया देश इसका जाग गया युवा
दिखाया लोकतंत्र में जनता ही बलवान है
नाज़ है इस देश पर ये मुल्क महान है
………………………………………….
आत्ममंथन का समय है ये संक्रमण काल है
देश नहीं खुद ही को बदलने का साल है
हम ही न भ्रष्ट होंगे तो भ्रष्टाचार जायेगा
नयी भोर की कोख में अंधकार समाएगा
हर आँखों में सपने हैं एक नयी उड़ान है
नाज़ है इस देश पर ये मुल्क महान है
………………………………………….
सम्भलना हमें ही होगा खुद ही आगे आएंगे
न कोसेंगे अँधेरे को स्वयं दीप जलाएंगे
हर प्राणी को आत्मदीपोभवः का पाठ पढ़ाएंगे
वतन को फिर से सोने की चिड़िया बनाएंगे
महर्षियों की भूमि है ये देवो का स्थान है
नाज़ है इस देश पर ये मुल्क महान है
………………………………………….
दीपक पाण्डेय
नैनीताल



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14 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

jlsingh के द्वारा
September 4, 2014

sawtntrat diwas ke uplakshy par aapkii sundar rachana nahee padh paaya der ke liye mujhe dukh hai!

    deepak pande के द्वारा
    September 5, 2014

    DHANYAWAAD AADARNIYA JAWAHAR JEE JO AAPNE ITNA SAMMAN DIYA AUR MERI KAVITA KO NA PADNE PAR AFSOS JATAYA EK MAHAAN RACHNAKAR HEE KISI KO ITNA SAMMAN DE SAKTA HAI

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
August 13, 2014

देश प्रेम की भावना ह्रदय में हो तो लेखनी इतनी ही सुंदर कविता लिख पायेगी ,————–आत्ममंथन का समय है ये संक्रमण काल है देश नहीं खुद ही को बदलने का साल है…दीपकभाई सही कहा आपने आत्म अवलोकन से बहुत सारे दोष मिट जाते हैं ,स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनायें .

    deepak pande के द्वारा
    August 14, 2014

    dhanyawaad aadarniya nirmala didi desh kee khatir bhawnaen to swayam aa hee jaati hain jis desh ne sab kuchh diya hai use kosne ke bajay kuchh sakaratmak karna hee behtar hai

एल.एस. बिष्ट् के द्वारा
August 13, 2014

हम ही न भ्रष्ट होंगे तो भ्रष्टाचार जायेगा नयी भोर की कोख में अंधकार समाएगा…………दीपक जी बहुत ही खूबसूरत कविता , हर पहलू से । 

    deepak pande के द्वारा
    August 14, 2014

    dhanyawaad aadarniya bisht jee isee prakaar protsahan ka aabhaari hoon samay samay par margdarshan pradan karte rahiyega

pkdubey के द्वारा
August 13, 2014

अप्रतिम और अनुपम रचना आदरणीय,देश की बहुत सुन्दर झांकी प्रस्तुत की आप ने.

    deepak pande के द्वारा
    August 13, 2014

    dhawaad aadarniya doobey jee bus kewal aalochnaon ke atirikt bhee is bharat me bahut kuchh karne ko hai wahee maine kavita ke madhyam se prayaas kiya hai

bhagwandassmendiratta के द्वारा
August 12, 2014

आज़ादी की 67वीं पूर्व संध्या पर आपकी ये कविता प्रेरणादायक है और भारत की गौरव गाथा का सटीक बखान भी करती है| आज फिर कह सकते हैं, कुछ तो है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौरे जहाँ हमारा|

    deepak pande के द्वारा
    August 12, 2014

    dhanyawaad aadarniya bhagwan jee blog par aane ka shukriya me wo nahee ki desh kaa ann khakar desh ko hee kosta rahoo bas jo sakaratmak dikha wahee likh diya apke margdarshan kaa aabhaari hoon

sadguruji के द्वारा
August 12, 2014

आत्ममंथन का समय है ये संक्रमण काल है देश नहीं खुद ही को बदलने का साल है हम ही न भ्रष्ट होंगे तो भ्रष्टाचार जायेगा नयी भोर की कोख में अंधकार समाएगा हर आँखों में सपने हैं एक नयी उड़ान है नाज़ है इस देश पर ये मुल्क महान है ! आदरणीय दीपक पाण्डे जी ! बहुत अच्छा सन्देश देती कविता ! देशभक्ति से आतप्रोत इतनी सुन्दर और सार्थक कविता प्रस्तुत करेंने के लिए ह्रदय से आभार !

    deepak pande के द्वारा
    August 12, 2014

    AADARNIYA JEEWAN KEE YE SAKARATMAKTA AAP HEE KE PRAVACHAN BHARE LEKH PADKAR AAYEE HAI SADAR AABHAAR

Shobha के द्वारा
August 12, 2014

दीपक जी आपने अति सुंदर कविता इसका शीर्षक भी बहूत अच्छा है डॉ शोभा

    deepak pande के द्वारा
    August 12, 2014

    DHANYAWAAD AADARNIYA SHOBHA JEE SAADAR AABHAAR


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