CHINTAN JAROORI HAI

जीवन का संगीत

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प्रयास

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मैंने बरसों पहले भावनाओं के कुछ बीज बोये थे
अनजान रिश्तों के कुछ सपने संजोये थे
कल्पनाओं के केनवस पर एक उपवन खींचा था
अंजलि भर आस्था के जल से नित सींचा था
श्रद्धा की ईंटों से बनाई वो क्यारी थी
विश्वास की वो अटूट फुलवारी थी

बीजों के अंकुरण का इंतज़ार था
उन दानों को मुझपर ऐतबार था
वो बीज माटी में फिर अंकुरित हुए
गैरों से भी नए रिश्ते सृजित हुए
हवा मिली एक नवीन सद्भावना की
पुष्प पल्लवन की मनोकामना की

बरसों बाद आज भावनाओं के वो दाने
आस्थाओं के दरख्तों में तब्दील हो चुके हैं
जिनमे श्रद्धा की कलियाँ खिली हैं
विश्वास के फल लदे हैं
सद्भावना के पत्तों से छनकर
रिश्तों की गुनगुनाती धुप
सबमे नया जोश भर रही है
और सर्वे भवन्तु सुखिनः की
मनोकामना को पूर्ण कर रही है

दीपक पाण्डे
नैनीताल



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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

jlsingh के द्वारा
August 22, 2014

bahut hee sundar bhawabhivyakti adarneey shri deepak pandey ji!

    deepak pande के द्वारा
    August 23, 2014

    pratikriya ke liye dhanyawaad aadarniya jawahar jee

sadguruji के द्वारा
August 22, 2014

सद्भावना के पत्तों से छनकर रिश्तों की गुनगुनाती धुप सबमे नया जोश भर रही है और सर्वे भवन्तु सुखिनः की मनोकामना को पूर्ण कर रही है ! आदरणीय दीपक पाण्डे जी ! बहुत सुन्दर और प्रेरक रचना ! अंतिम चार पंक्तियाँ लाजबाब हैं ! बहुत बहुत बधाई !

    deepak pande के द्वारा
    August 22, 2014

    dhanyawaad aadarniya sadgurujee aapka ek ek comment mere liye protsahan ke saath saath aasheerwad hai aapke saman dharmik aur samaj hitkari to nahee likh paata magar aapse prerna pakar kuchh man ke vichar likh deta hoon

pkdubey के द्वारा
August 22, 2014

सुन्दर और सरल रचना आदरणीय.आप वरिष्ठ लोग अवश्य ही हम कनिष्ठों के बीच में बने रहे.बहुत दिन बाद आप को पढ़ा.सादर आभार .

    deepak pande के द्वारा
    August 22, 2014

    dhanyawaad aadarniya doobey jee main varisht to nahee lekhan me pichhle 2 saal se hoon aur is lekhan ke liye tajoorba ke saath saath aapke saman samvedansheel hona jaruri hai jitnee samvednae hongi utna hee rachna umda hogi


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