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एक शिक्षक का पिता(शिक्षक दिवस पर)

Posted On: 2 Sep, 2014 social issues,Junction Forum,Hindi Sahitya,Others में

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दिसंबर का महीना शाम के छह बजे होंगे रामनरेश त्रिपाठी जी अपनी कुर्सी पर बैठे थे अचानक फ़ोन की घंटी घनघना उठी रामनरेश जी के फ़ोन उठाने पर एक नवयुवती की आवाज़ सुनाई दी क्या त्रिपाठी सर घर पे हैं रामनरेश जी बोले वो तो नहीं है मैं उसका पिता बोल रहा हूँ मैं अपने बेटे को आपका सन्देश दे दूंगा क्या कहना है उधर से आवाज़ आयी अंकल मैं रेनू बोल रही हूँ हमारी माँ को पापा अस्पताल ले गए थे और माँ का स्वर्गवास हो चूका है हम दो बहने घर में अकेली हैं यदि हो सके तो सर को भेज दो हमें बड़ा डर लग रहा है रामनरेश जी ने खुद को सँभालते हुए कहा बेटा तो ट्रेनिंग में दुसरे शहर गया है रेनू तुम घबराओ मत मैं खुद अपनी बहु के साथ तुम्हारे पास आ रहा हूँ
फ़ोन रखते ही रामनरेश जी ने घटना का विवरण देकर अपनी बहु से तैयार होकर चलने को कहा रस्ते भर रामनरेश जी उस दिन के बारे में सोचते रहे की जब उनके बेटे ने अच्छी नौकरियां ठुकराकर विद्यालय में अध्यापक बनने का निर्णय लिया था उनकी अपने बेटे से बहुत बहस हुई थी आखिर क्या रखा है मास्टर की नौकरी में न पैसा न शौहरत अब इज़्ज़त भी तो नहीं रही इस नौकरी में यह रेनू करीब ६ वर्ष पहले १२ कक्षा में उनके बेटे से गणित पड़ने आया करती थी तब लोग उनके घर में बेटे के अध्यापक होने पर सहानुभूति जताने आते थे वह भी अपने आप को एक शिक्षक के पिता के रूप में पहचाने जाने से कतराते थे
आज वो सोच रहे थे की क्या आज भी समाज में एक अध्यापक पर इतना विश्वास कायम है उन्हें आज अपने बेटे पर नाज़ था आज उनके बेटे ने उन्हें वो सुख दिया था जो वो बयान नहीं कर सकते थे आज वो गर्व से इस समाज को चिल्ला चिल्ला कर कहना चाहते थे की हां मैं एक शिक्षक का पिता हूँ और फख्र है मुझे एक शिक्षक का पिता होने पर जिसने आज मुझे वो सब दिया है जो शायद मेरे अन्य अमीर बेटे जिंदगी भर भी नहीं दे सकते



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10 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yamunapathak के द्वारा
September 7, 2014

अत्युत्तम दीपक जी साभार

    deepak pande के द्वारा
    September 7, 2014

    dhanyawaad aadarniya yamna jee rotsahan aur pratikriya hetu sadar aabhaar

jlsingh के द्वारा
September 4, 2014

प्रेरक प्रसंग शिक्षक दिवस पर! मेरे भी कई शिक्षक ऐसे थे जिन्हे देख सर अपने आप झुक जाता था/ जाता है…… सादर पाण्डे जी!

    deepak pande के द्वारा
    September 5, 2014

    DHANYAWAD AADARNIYA SINGH SAHAB ADHYAAK HONE KE NATE KUCHH LIKHNA ARRI THA SO ANE JEEWAN KA HEE RASANG LIKH DALA BLOG AR AANE KE LIYE AABHAAR

pkdubey के द्वारा
September 4, 2014

बहुत गहन शिक्षाप्रद आलेख आदरणीय |

    deepak pande के द्वारा
    September 5, 2014

    DHANYAWAAD AADARNIYA DOOBEY JEE

Shobha के द्वारा
September 3, 2014

पाण्डेय जी बहुत अच्छे विचार डॉ शोभा

    deepak pande के द्वारा
    September 5, 2014

    DHANYAWAAD AADARNIYA SHOBHA JEE YE MERE HEE JEEWAN KA EK VRITANT HAI SOCHA LIKH HEE DETA HOON

bhagwandassmendiratta के द्वारा
September 3, 2014

शिक्षक दिवस पर शिक्षकों के सम्मान में आपका ये प्रयास सराहनीय है| समाज में शिक्षक वर्ग को जितना सम्मान दिया जाना चाहिय था नहीं दिया जा रहा है| दरअसल आज पैसा ही सम्मान की कसोटी पर कसा जाता है न कि चरित्र को| लेकिन आप के द्वारा सही वक्त पर सही पीड़ा का अनुभव कराया गया| आप को बहुत बहुत साधुवाद|

    deepak pande के द्वारा
    September 5, 2014

    DHANYAWAAN AADARNIYA BHAGWAN JEE AAJ BHEE GURU KAA UTNA KYA USASE JYADA SAMMAN HAI BUS GURU BHEE GURU JAISA HEE HO EK SHIKSHAK HONE KE NATE MAINE YE MEHSOOS KIYA HAI


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