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रुक ही जाते तो मोहाजिर ठहराए वहाँ नहीं जाते

Posted On: 4 Nov, 2014 कविता,Junction Forum,Hindi News में

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इस मुल्क में कई पंडित औ मुल्ला ,इमाम हैं
बेवजह के मुद्दे यूं उठलाए यहाँ नहीं जाते
…………………………………………..

रिस रिस के जख्म रिश्तों के नासूर बन जाते हैं जब
जख्म वो यूं इस कदर सहलाये यहाँ नहीं जाते
………………………………………………….

देश क्या इंसानियत के सबसे बड़े दुश्मन हैं जो
दावतों में बिन वजह यूं बुलवाये यहाँ नहीं जाते
…………………………………………….

जिहाद के नाम पर खूं बहाना ही जिनका है हुनर
वो यज़ीद भी पैगम्बर कहलाये यहाँ नहीं जाते
…………………………………………………

कुचल दिए जाते हैं ज़हरीले नागों के भी फन यहां
आस्तीनों के सांप दूध से नहलाये यहाँ नहीं जाते
………………………………………………………..

बस दहशतों के साये में पले हैं जाँ लेना ही जाना है वो
अमन और शान्ति के हुनर सिखलाये वहाँ नहीं जाते
………………………………………………………

इस वतन में हर एक शक्श हामिद , अब्दुल कलाम है
धर्म के नाम पर अब लोग बरगलाये यहाँ नहीं जाते
………………………………………………………..

जो भाई गए उस पार अब तक सह रहे हैं त्रासदी
रुक ही जाते तो मोहाजिर ठहराए वहाँ नहीं जाते
…………………………………………………..

दीपक पाण्डेय
नैनीताल



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15 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shobha के द्वारा
November 11, 2014

पांडे बहुत सुंदर भाव पूर्ण कविता डॉ शोभा

    deepak pande के द्वारा
    November 12, 2014

    Dhanyawaad aadarniya shobha sadar naman hausla badane hetu dhanyawaad

sadguruji के द्वारा
November 9, 2014

आदरणीय दीपक पाण्डे जी ! सादर अभिनन्दन ! दिन मंगलमय हो ! सबसे पहले तो आपको नए ब्लॉग अवतार में प्रकट होने की बधाई ! काफी समय के बाद आप मंच पर एक नई रचना के साथ उपस्थित हुए है ! सार्थक और विचारणीय रचना ! बहुत प्रभावी और सारगर्भित पंक्तियाँ-जो भाई गए उस पार अब तक सह रहे हैं त्रासदी रुक ही जाते तो मोहाजिर ठहराए वहाँ नहीं जाते ! अच्छे लेखन के लिए बधाई !

    deepak pande के द्वारा
    November 9, 2014

    Dhanyawaad aadarniya sadguruji aapkee tippani mere liye prerna kasrot hai saabhaar

ranjanagupta के द्वारा
November 9, 2014

दीपकजी तनिक देर से ही सही आपकी रचना पढ़ी !सुंदर शब्दों और भावो का समन्वय उसे और भी सुंदर बना रहा है !इतनी अच्छी पोस्ट के लिए बधाई !सादर !साभार !

    deepak pande के द्वारा
    November 9, 2014

    Dhanyawaad aadarniya ranjana jee sarthak tippani ke liye

bhagwandassmendiratta के द्वारा
November 8, 2014

दीपक जी नमस्कार, पड़ोसी देश के देश के दोगलेपन का सटीक चित्रण किया है आपने, परन्तु कुछ महत्वाकांक्षी देशवासी इस सचाई को कब जानेगें| ईश्वर उनको भी सद्बुद्धि देंगें ऐसा मेरा विशवास है| सुन्दर प्रस्तुति के लिए आपको बहुत बहुत बधाई हो| भगवान दास मेहंदीरत्ता, गुड़गांव

bhagwandassmendiratta के द्वारा
November 8, 2014

दीपक जी नमस्कार, पड़ोसी देश के देश के दोगलेपन का सटीक चित्रण किया है आपने, परन्तु कुछ महत्वाकांक्षी देशवासी इस सचाई को कब जानेगें| ईश्वर उनको भी सद्बुद्धि देंगें ऐसा मेरा विशवास है| सुन्दर प्रस्तुति के लिए आपको बहुत बहुत बधाई हो| भगवान दास मेहंदीरत्ता ,गुड़गांव

    deepak pande के द्वारा
    November 8, 2014

    dhanyawaad aadarniya bhagwan sir hosla badane ke liye

DR. SHIKHA KAUSHIK के द्वारा
November 5, 2014

manobhavon kee sarthak abhivyakti .badhai

    deepak pande के द्वारा
    November 7, 2014

    Dhanyawaad aadarniya shikha jee

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
November 5, 2014

रिस रिस के जख्म रिश्तों के नासूर बन जाते हैं जब जख्म वो यूं इस कदर सहलाये यहाँ नहीं जाते बहुत उम्दा पंक्तिया आदरणीय दीपक जी ,आतंकबाद वास्तव में आस्तीन का सांप है .

    deepak pande के द्वारा
    November 7, 2014

    Dhanyawaad aadarniya nirmala jee

pkdubey के द्वारा
November 5, 2014

सच्ची रचना आदरणीय.कोई भी धर्म दहशत फ़ैलाने से बड़ा नहीं हो सकता | सादर आभार |

    deepak pande के द्वारा
    November 8, 2014

    Dhanyawaad aadarniya doobey jee sarthak tippani ke liye


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