CHINTAN JAROORI HAI

जीवन का संगीत

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हल्का प्रयास ही सही बचपन उधार दे दो(जागरण जंक्शन फोरम)

Posted On: 14 Nov, 2014 Others,कविता,Junction Forum में

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जन्मने से पहले जो जीवन न पा सका
जो देखने बचपन दुनिया में न आ सका
जिस माँ को खुदा के समकक्ष दर्जा दिया गया
उसी कोख में बचपन का ही क़त्ल किया गया
मारा उसी ने जो दुनिया को देता रहा मरहम
मानवता की रक्षा की जिसने खाई थी कसम
अजन्मी संतानो को जन्म का उपहार दे दो
हल्का प्रयास ही सही बचपन उधार दे दो
……………………………………………..

एक माँ की गोद में तो एक उंगली को थामे
भीख मांगते गुजरते क्या सुबह और शामे
बढ़ते जा रहे हैं तीनों इसी आगोश में
ज्यादा कुछ मिलेगा भावनाओं के जोश में
वो बचपन जो बचपन में बना बाल मजदूर है
रोटी की विवशता को कमाने को मजबूर है
बिलखते हुए बचपन को थोड़ा श्रृंगार दे दो
हल्का प्रयास ही सही बचपन उधार दे दो
……………………………………………..

बचपन जो थैली लिए बैठा है कूड़े के ढेर पर
आज ज्यादा कुछ पायेगा इसको उकेर कर
बचपन जो आज घर में भी महफूज़ नहीं है
अपनों की ही कुदृष्टि है ये मालूम नहीं है
बचपन में ही जो बचपन से महरूम हो गया
समय से पहले जिसको सभी मालूम हो गया
इन बच्चों की खातिर एक सलाहकार दे दो
हल्का प्रयास ही सही बचपन उधार दे दो
……………………………………………..

किंकर्तव्यविमूढ़ खड़ा है वो इस दयार में
जकड़ा जा रहा है अश्लीलता के संसार में
जिसे मवेशियों की भाँती यूं ठेल दिया गया
देह व्यापार की गलियों में धकेल दिया गया
हैवानियत में पला तो खुद हैवान बन गया
दुनिया की नज़रों में मासूम शैतान बन गया
बदलो कुछ इनका भी जीवन चमत्कार दे दो
हल्का प्रयास ही सही बचपन उधार दे दो
……………………………………………..

महत्वाकांक्षाओं में बड़ो की गुमसुम सा हो गया
ऐसे जैसे किसी अधखिले कुसुम सा हो गया
प्रतियोगिता की दौड़ में न अब कोई ठहराव है
अव्वल ही आना बस है ये ही तनाव है
माँ बाप हैं मगर नहीं ममता का आँचल है
पालने को इन्हे मिला बस आया का दल है
अपने इन बच्चों को थोड़ा सा प्यार दे दो
हल्का प्रयास ही सही बचपन उधार दे दो
……………………………………………..

आज करुण रस है कविता की आवाज़ में
मनाएं बाल दिवस कुछ इस अंदाज़ में
कविता को पड़ कर इस थोड़ा करें मनन
दुनिया के इन बच्चों का समझो जरा क्रंदन
इन्हे भी दे दो जरा बचपन का वो आँगन
चिंतन करो और चिंतन को थोड़ा निखार दे दो
हल्का प्रयास ही सही बचपन उधार दे दो
……………………………………………..

दीपक पाण्डेय
नैनीताल



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9 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
December 12, 2014

बाल दिवस पर अत्यंत भाव पूर्ण ,सार्थक एवं सच्ची रचना का सृजन किया है दीपक भाई ,मै पिछले लगभग १ माह से बाहर थी तो जेजे पर समय नहीं दे सकी थी आपका आभार की आपने बताया वरना इतनी सुंदर रचनाएँ नहीं पढ़ पाती ,बहुत संवेदनात्मक प्रस्तुत्ति .

Shobha के द्वारा
November 23, 2014

श्री पाण्डेय जी बहुत ही सुंदर कविता दो बार से प्रतिक्रिया दे रही हूँ पता नहीं क्यों नही आ रही फिर प्रयत्न किया हैं डॉ शोभा भारद्वाज

yamunapathak के द्वारा
November 21, 2014

पाण्डेय जी आपने बचपन को हर कोण से प्रस्तुत किया है बहुत प्रभावकारी प्रस्तुति है साभार

sanjay kumar garg के द्वारा
November 17, 2014

बचपन उधार दे दो…. सुन्दर कविता साभार! आदरणीय पाण्डेय जी!

    deepak pande के द्वारा
    November 17, 2014

    Aadarniya sanjay jee sadar dhanyawaad bahut dino se aapkee rachna padne ka awsar nahee mila aasha hai aap kuchh likhein

एल.एस. बिष्ट् के द्वारा
November 17, 2014

बिलखते हुए बचपन को थोड़ा श्रृंगार दे दो हल्का प्रयास ही सही बचपन उधार दे दो………………..दीपक जी, बहुत सुंदर कविता समाज और जिंदगी से रू-ब-रू करवाती और कुछ सोचने को मजबूर करती ।

    deepak pande के द्वारा
    November 17, 2014

    Dhanyawaad aadarniya bisht jee rachna kee sarahna ke liye

deepak pande के द्वारा
November 14, 2014

Dhanyawaad aadarniya dubey jee

pkdubey के द्वारा
November 14, 2014

भ्रूण ह्त्या ,गरीबी और अमीरी का सच एवं एक अच्छा मार्गदर्शन   देती रचना ,सादर आभार आदरणीय .


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