CHINTAN JAROORI HAI

जीवन का संगीत

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नक्सलियों से लड़ते जांबाज़ का खत पिता के नाम (कविता)

Posted On: 12 Dec, 2014 कविता,Junction Forum,Hindi Sahitya में

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माफ़ करना ए मेरे पिता
अबकी घर न आ पाऊंगा
बेटा होने का फ़र्ज़
भी नहीं निभा पाऊंगा
गोद में तुम्हारे बड़ा
कंधो पर तुम्हारे चढ़ा
उन्ही कन्धों पर चढ़ के
आज इस दुनिया से जाऊँगा
……………………………….
माफ़ करना मेरी माँ
अबकी न आ सका
बेटा ये तुम्हारे वास्ते
दवाई न ला सका
संघर्ष जिनका देख कर
तुम्हारी याद आयी थी
उन महिलाओं में तुम्हारी
ही तो छवि पाई थी
अफ़सोस उन्होंने ही
हम पर गोलियां चलाई थी
……………………………….
दुर्दशा जिन बच्चों की देख
हमारी आँखें भर आयी थी
अफ़सोस उन्ही बच्चों ने
बारूदी सुरंगे बिछाई थी
जिनसे लड़नी थी लड़ाई
वो सामने भी न आये थे
उन नारियों के आँचल में छिपे
नरपिशाचाों के साये थे
………………………………
हमने भी न मानी हार
पलट के किया वार
मरते मरते सारी गोलियां
उन पर चलाई थी
………………………..
जानते हैं सभ्य समाज
ये न समझ पायेगा
उनके क़त्ल का इल्जाम
हम पर ही लगाएगा
फिर सामने मानवाधिकार
का अवतार आएगा
वहशी हमें उन नरपिशाचों
को मासूम बतलायेगा
ये बतला के खुद के बुद्धिजीवी
होने का ढोंग रचायेगा

दीपक पाण्डेय
नैनीताल



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10 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

jlsingh के द्वारा
December 14, 2014

मार्मिक कविता और जांबाज शहीदों को श्रद्धांजलि भी! नमन!

    deepak pande के द्वारा
    December 17, 2014

    Dhanyawad aadarniya jawahar jee sarthak tippani ke liye

sadguruji के द्वारा
December 13, 2014

आदरणीय दीपक पांडे जी ! सार्थक और विचारणीय रचना ! बहुत बहुत अभिनन्दन व् बधाई ! इस समस्या की जड़ तक कभी सरकार नहीं गई है, इसलिए कोई हल भी नहीं निकल पाया है ! मंच पर इस विचारणीय कविता की प्रस्तुति के लिए आभार !

    deepak pande के द्वारा
    December 21, 2014

    Dhanyawaad aadarniya sadguruji busy hone ke karan apke pravachan roopi blog se vanchit hoo

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
December 12, 2014

बहुत सही आंकलन नक्सली आतंक का ,आदरणीय दीपक जी आपकी लेखनी ने भावुक के दिया,एक युवा सैनिक सच में यही सोचता होगा ,ह्रदय स्पर्शी रचना,हार्दिक अभिनन्दन .

    deepak pande के द्वारा
    December 21, 2014

    Dhanyawaad nirmala di

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
December 12, 2014

दीपक पण्डे जी यह जीवन के संगीत मैं चिंतन युद्ध न लड़ने वाले का हो सकता है किन्तु युद्ध लड़ते को तो सिर्फ शहीद का तमगा और स्वर्ग के द्वार ही दिखये जाते हैं तभी तो ओम शांति शांति पाता है

    deepak pande के द्वारा
    December 22, 2014

    Dhanyawaad aadarniya harishchandra jee

pkdubey के द्वारा
December 12, 2014

एक दिव्य श्रंद्धांजलि, आदरणीय,उन वीर सहीदों को |ऐसी वीर ही राष्ट्र और भारतमाता के सच्चे सपूत हैं,जिन्हे सादर नमन |

    deepak pande के द्वारा
    December 12, 2014

    Dhanyawaad aadarniya dubey jee


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