CHINTAN JAROORI HAI

जीवन का संगीत

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खंज़र उसका भी किसी के खूं से नहाया हुआ होगा

Posted On: 20 Feb, 2015 Others,कविता,Junction Forum में

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बेआबरू होकर निकाला गया हूँ आज, जिसके मैं दर से
सोचता हूँ वो जमाने में कितना ,सताया हुआ होगा
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सुना है आजकल वो करने लगा है, धर्म की कुछ बातें
खंज़र उसका भी किसी के खूं से ,नहाया हुआ होगा
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गली मैं जाते ही दौड़ा देता है , ले करके वो पत्थर
दुनिया में वो किस कदर चोट ,खाया हुआ होगा
…………………………………………………………

एक मुद्दत से इस आँगन में, न खिला है कोई फूल
किसी कली को कोख में यहां ,दफनाया हुआ होगा
………………………………………………………

आज भी ज़िंदा है वो भंवरा कई, कलियों को मसल
बागबान उसकी पैरवी को कोई, आया हुआ होगा
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शागिर्द आज काट रहा है मेरा ही ,शीश सरे आम
ये हुनर उसे मैंने ही कभी, सिखलाया हुआ होगा

दीपक पाण्डेय
नैनीताल



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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sadguruji के द्वारा
February 25, 2015

आदरणीय दीपक पाण्डेय जी ! अभिनन्दन और बधाई ! बहुत सुन्दर गजल ! गली मैं जाते ही दौड़ा देता है , ले करके वो पत्थर दुनिया में वो किस कदर चोट ,खाया हुआ होगा !

    deepak pande के द्वारा
    February 25, 2015

    dhanyawaad aadarniya sadgurujee blog me aane aur rachna par manthan hetu sadar dhanyawaad


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