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जीवन का संगीत

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आत्मग्लानि (लघु कथा)

Posted On: 10 Oct, 2015 Others,Junction Forum,Politics में

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सुलतान शहर का बड़ा व्यापारी है पांच वक्त का नमाजी धार्मिक व्यक्ति I अबकी बार अपने पिता को हज भेजना चाहता है परन्तु वीज़ा मिलने में कुछ कठिनाई हो रही है I अतः वह शहर के नेता के पास गया सिफारिश के लिए नेता जी ने प्यार से घर बैठाया खैरियत पूछी कारण बताने पर नेता जी बोले कि तुम तो जानते ही हो दूसरी पार्टी का राज़ है हमारे एक एक काम पर सियासत की नज़र है यह काम मुश्किल है यह सुनते ही सुलतान के अब्बा भड़क उठे बोले ” बहुत देखा तुमको, तुम्हारे एक इशारे पर हमारे लोग पैसा देते हैं जरुरत पड़ने पर दंगे भी कराये जाते हैं और आज तुम हमारा काम नहीं करोगे अब हम यहां एक पल भी नहीं रुकेंगे ” इतना सुनते ही नेता जी मुस्कराते हुए बोले ” चचा नाराज़ मत हो ” और एक फ़ोन लगाया गया परन्तु यह क्या ये फ़ोन तो दूसरी पार्टी के उस कद्दावर नेता को था जिसके एक भाषण पर सांप्रदायिक दंगे हो जाया करते हैं इन दोनों में इतने प्रगाढ़ सम्बन्ध ? काम हो चुका था I
सुलतान जानता था उसका काम हो चुका था फिर भी वह खुश नहीं था वह जानता था ये दोनों अपने अपने धर्मों के वही नेता थे पिछली बार जिनके एक भाषण से दंगे भड़क उठे थे और सैकङो लोगों की जानें गयी थी इन दोनों में इतने प्रगाढ़ सम्बन्ध , वह सोच भी नहीं सकता था हालांकि वह जानता था दूर के रिश्ते में इन दोनों की वैवाहिक सम्बन्ध होने से रिश्तेदारी भी थी I
वह सोच रहा था जिस सियासत से वो आज तक नफरत करता था कितना भाईचारा है इन लोगों में आपस में और यहां तक की रिश्तेदारी भी बस दुनिया की नज़र में वे विरोधी हैं और हम आम आदमी इनके एक इशारे पर कत्लेआम को तैयार हो जाते हैं आज काम हो जानें पर भी वह भारी मन से वापस लौटा उसका मन अपने स्वयं के प्रति आत्मग्लानि से भरा हुआ था I



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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

atul61 के द्वारा
October 13, 2015

बहुत अच्छा प्रेरक प्रसंग I कटु सत्य

    deepak pande के द्वारा
    October 13, 2015

    dhanyawaad aadarniya atul kumar jee katha par manthan karne ke liye

Alka के द्वारा
October 10, 2015

दीपक जी , ये लघु कथा बहुत ही महत्वपूर्ण और प्रेरक सन्देश दे गई | वैसे भी कथाएं मुझे बहुत भाती है | आगे भी लिखते रहिएगा |

    deepak pande के द्वारा
    October 11, 2015

    dhanyawaad adarniya alka jee aaj kee paristhiti ko dekhte hue ye laghu katha likhi halanki yah ek sachchi ghatna par hee aadharit hai blog me aane evam usahvardhan ke liye dhanyawaad

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
October 10, 2015

आपकी छोटी सी लघु कथा ने एक बड़ा सन्देश दे दिया की राजनीती में उतरे हुए लोगों का न कोई धर्म है न ईमान और न ही मयार.अच्छा सन्देश देती कहानी .

    deepak pande के द्वारा
    October 10, 2015

    ब्लॉग पर आने और अपना बहुमूल्य समय देने के लिए धन्यवाद आदरनिय निर्मला दीदी


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