CHINTAN JAROORI HAI

जीवन का संगीत

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ज्ञान मंदिर शतरंज की बन गया है इक बिसात

Posted On: 3 Nov, 2015 कविता,Junction Forum,Hindi Sahitya में

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अब नहीं अर्जुन कोई अब नहीं कोई एकलव्य बचा
द्रोण का गुरुकुल महज़ अब भोजनालय रह गया
………………………………………………………..
ज्ञान मंदिर शतरंज की बन गया है इक बिसात
द्रोण,भीष्म,कृपाचार्य सब अब चल रहे हैं गोटियां
………………………………………………………….
धूर्त वो धृतराष्ट्र अपने स्वार्थ में हैं डूबता
नित नए षड़यंत्र में शकुनियों के घिर रहा
…………………………………………………
महारथी हर एक कौरव मंडली में दिख रहा
ओट में अन्धकार के सत्य भी अब छिप रहा
…………………………………………………
हरण हो रहा नगर में हर द्रोपदी के चीर का
आ रहा धुँधला नज़र किरदार भी अब कृष्ण का
…………………………………………………..
खिलने से पहले ही कलियाँ दफ़न हो जाती यहां
अश्वस्थामा हर इक चिकित्सक कोख हर एक उत्तरा
………………………………………………………….
चरित्र भी इंसान का इस कदर अब गिर रहा
ढूंढता हैं फिर रहा ज़नाज़ों में भी बोटियाँ
…………………………………………………
ठंडी नहीं होने पाई मासूम की अब तक चिता
सेंकने लगा हाय मनुज उसमे भी अपनी रोटियां

दीपक पाण्डेय
नैनीताल



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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

एल.एस. बिष्ट् के द्वारा
November 9, 2015

आदरणीय दीपक पांडेय जी बहुत सुंदर और यथार्थवादी रचना । अच्छा लगा पढ कर । दीपावली की शुभकामनाओं सहित ।

    deepak pande के द्वारा
    November 9, 2015

    dhanyawaad aadarniya bistt jee aapko bhee deepawali kee shubhkamnaen

Shobha के द्वारा
November 4, 2015

श्री दीपक जी कविता के माध्यम से आपने बहुत अच्छे विचार प्रगट किये हैं |

    deepak pande के द्वारा
    November 5, 2015

    dhanyawaad aadarniya shobha jee protsahan ke liye dhanyawaad

pkdubey के द्वारा
November 4, 2015

aaj ke bharat kaa sachchaa prativimb.sadar sadhuvaad aadarneey sir ji.

    deepak pande के द्वारा
    November 5, 2015

    dhanyawaad aadarniya dubey jee bahut dino baad mulakaat huee blog par


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