CHINTAN JAROORI HAI

जीवन का संगीत

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विश्वास रहे वही बचपन सा (कविता)

Posted On: 12 Nov, 2015 Junction Forum,Hindi Sahitya में

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बचपन में एहसास बहुत था

नन्हें दीपों में प्रकाश बहुत था

छोटी सी थी अपनी धरती

पर ऊँचा आकाश बहुत था

……………………………

गेरू के गोले वृत्ताकार से

माँ ने रचे पाँव बिस्वार से

कहती थी पग इन पर रखकर

लक्ष्मी जी आएंगी अपने घर

नन्हें मुन्ने उन बच्चों को

बातों पर इन विश्वास बहुत था

……………………………………

सुख व शान्ति से भरा हुआ घर

लक्ष्मी जी भी आयी मंदिर पर

प्रभु तुझसे है, बस यही अर्चना

विश्वास रहे वही बचपन सा

दीपक पाण्डेय
नैनीताल



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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

pkdubey के द्वारा
November 13, 2015

वही मूल पर्व था,अब तो तमाशा अधिक है आदरणीय ,सादर |

    deepak pande के द्वारा
    December 31, 2015

    dhanyawaad aadarniya dubey jee


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