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सब्सिडी (देश के विकास में बाधक)

Posted On: 17 Jan, 2016 Others,Junction Forum में

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मैं जिक्र करना चाहूँगा एक सरकारी अस्पताल का जहां एक महिला के आठवीं औलाद होने वाली थी पूछने पर पता चला की उसका पति मजदूरी करता है खर्च के बारे में पूछने पर वह बोला वह गरीबी रेखा से नीचे आता है अतः उसे दवा का कोई खर्च नहीं पड़ेगा उल्टा सरकारी स्कीम के तहत स्वस्थ जच्चा बच्चा को कुछ धनराशि भी दी जाएगी बी पी एल के अंतर्गत उसे राशन तो मुफ्त मिल ही जाता है अतः कोई कष्ट नहीं है
एक पुरानी कहावत है की भूखे की मदद करनी है तो उसे मछली न देकर मछली पकड़ना सिखाओ मछली देकर उसकी एक वक़्त की भूख मिटेगी मछली पकड़ना सीखकर उसकी हमेशा की भूख मिट जाएगी इसी प्रकार अनुदान देकर सरकार इस निम्न वर्ग की भूख मिटाकर सरकार उसे आलसी और कामचोर बनाती जा रही है साथ साथ जनसँख्या विस्फोट के द्वारा ये देश के विकास में भी बाधक हो रहे हैं
गरीबों को दिया जाने वाला यह अनुदान आम भारतीय द्वारा दिए गए टैक्स से दिया जाता है मगर आम गरीब इसे अपना अधिकार समझ बैठा है चूंकि हमारे पास संसाधन तो सीमित हैं तो यह अनुदान के सहारे बढ़ती जनसँख्या देश के विकास में बाधक है इसके दुष्परिणामों के विभिन्न पहलुओं पर में ध्यान आकर्षित करना चाहूँगा
(१) सीमित संधान होने के कारन इसका बोझ सरकारी अस्पताल पर पड़ता है तथा व्यर्थ भीड़ बढ़ती है और वास्तविक आम जान सुविधाओं से वंचित रह जाता है और सभी के स्वस्थ होने का सपना केवल सपना ही रह जाता है और आम जन को प्राइवेट अस्पताल जाना पड़ता है
(२) क्यूंकि इन लोगों का उद्देश्य केवल जनसंख्या बढ़ाकर देश पर बोझ देना ही होता है इनके खाने का प्रबंध तो सरकार की वितरण प्रणाली द्वारा हो जाता है उसके बाद ये अपने बच्चों को पड़ने भी नहीं भेजते तथा इनकी औलाद धनार्जन की खातिर बाल श्रम वाले उद्योगों में झोंक दी जाती है I
(३)इस प्रकार ज्यादा बच्चों का ढंग से लालन पालन न होने के कारन यही बच्चे धन के लालच अपने माता पिता द्वारा ही देह व्यापार की अंधी गलियों में छोड़ दिए जाते हैं और इनका बचपन ऐसी नारकीय जिंदगी जीने को अभिशप्त होता है I
(४)चूंकि संख्या में ज्यादा होने की वजह से माँ बाप इनका पूरा ख्याल रखने और संस्कार देने में सक्षम नहीं होते तो ऐसे बच्चों का इस्तेमाल धार्मिक ठेकेदारों द्वारा ब्रेनवाश कर विभिन्न धार्मिक उन्मादों ,दंगों ,आपराधिक कृत्यों तथा यहां तक कि आतंकवादी तक बना देने में किया जाता है I
(५) यह वही जनसँख्या है जो आगे चलकर अनपढ़ मतदाता का रूप धारण करती है और चुनाव में धर्म और जाति या फिर धन के नाम पर बरगलाकर इनका नकारात्मक उपयोग किया जाता है और परिणामस्वरूप आज भी भारत के विशाल लोकतंत्र में अनपढ़ और अपराधिक पृष्ठभूमि के राजनीतिज्ञ चुने जाते हैं इस प्रकार यह लोकतंत्र के लिए भी खतरा साबित होते हैं
(६)निर्भया काण्ड के बारे में तो सूना ही होगा यह भी इन्ही नस्लों का परिणाम होता है उचित देखभाल और संस्कार न मिल पाने के कारण ये मासूम अपराधी बन जाते हैं तथा निर्भया जैसे जघन्य काण्ड करने पर भी शर्मिन्दा होते
(७) ऐसी अधिकतर औलादें धन के लालच की खातिर स्वयं माता पिता दवरा ही बेचे जाने पर मानव तस्करी का पर्याय बनती हैं

अतः मेरा सरकार से अनुरोध है कि इस स्वयं सरकार द्वारा ऐसी नकारात्मक जनसँख्या विस्फोट को सब्सिडी प्रदान कर बढ़ावा न दिया जाय सरकारी अनुदान का लाभ केवल उन्ही परिवारों को दिया जाय जिनके दो या दो से कम बच्चे हों दो से ज्यादा बच्चे होने पर सरकारी अस्पताल में भी मुफ्त डेलिवरी या मुफ्त दवा का प्रावधान कर जनसँख्या विस्फोट को बढ़ावा न दिया जाय सार्वजनिक वितरण प्रणाली द्वारा गैस सिलिंडर की भाँती अनुदान सीधे व्यक्ति के खाते में दिया जाय तथा अनुदान केवल दो बच्चे के लिए हो दो से ज्यादा बच्चे पैदा करने का अर्थ है वह व्यक्ति स्वयं उसे पलने में सक्षम है अतः उसकी अनुदान राशि बंद कर देनी चाहिए
अक्सर यह देखा गया है की आरक्षण का लाभ मुख्यतः आरक्षित वर्ग के उस संपन्न लोगों द्वारा ही भोग लिया जाता है जिसे इसकी आवश्यकता भी नहीं है तथा निम्न गरीब वर्ग आरक्षित श्रेणी me होने के बावजूद भी उसका लाभ नहीं उठा पाता यही प्रक्रिया आरक्षण देने में भी लागू करनी चाहिए आरक्षण पाने वाले व्यक्ति की दो संतान ही आरक्षण की पात्र हो दो से ज्यादा औलाद होने पर उस व्यक्ति को संपन्न मानकर उसे कोई आरक्षण की सुविधा नहीं देनी चाहिए गैस प्रणाली की ही भाँती दस लाख सालाना से ज्यादा कमाने वाले को आरक्षण की सुविधा से वंचित रखा जाना चाहिए जिससे कि आरक्षण देने का सही फायदा पूरी जाति को सामान रूप से मिल सके तथा आरक्षित जाति का निम्न वर्ग भी उसका सम्पूर्ण फायदा ले सके
इससे देश का समग्र विकास होगा देश से धार्मिक दंगे,मासूम अपराधी,मानव तस्करी ,बाल श्रम ,आतंकवाद जैसी समस्याओं में भी कमी आएगी और देश खुशहाली की और अग्रसर होगा



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