CHINTAN JAROORI HAI

जीवन का संगीत

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सज़दा

Posted On: 20 Dec, 2017 कविता में

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तेज़ क़दमों से वह अपनी ही धुन में बढ़ता जा रहा था आज अपने ही जनरल स्टोर की सफाई में इतना मशगूल हो गया कि नमाज़ का ख्याल ही न रहा जुम्मे की नमाज़ में बस थोड़ा ही वक़्त बाकी था I परन्तु यह क्या मस्जिद के पास ही कुछ लोगों की भीड़ दिखाई दी पास जाकर पता चला कि ये उसी की बिरादरी के लोग थे जो मंदिर के पुजारी जी से बहस कर रहे थे I असल में उनके मोहल्ले के एक लड़के ने बॉल फ़ेंक कर पुजारी जी के घर का शीशा तोड़ दिया था I पंडित जी ने उस लड़के के दो थप्पड़ रसीद कर दिए I अब यह मामला मामूली न होकर सम्प्रदियिक हो चला था I वह जनता था कि पिछले वर्ष ही ऐसे ही एक चोरी के छोटे से मामले को राजनीतिज्ञों और धर्म के ठेकेदारों ने साम्प्रदायिक रूप देकर अपनी रोटियां सेंकी थी I नतीज़तन हुए दंगों में कई मासूमों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था I
उसने आव देखा न ताव तुरंत पंडित जी की ओर से उन लोगों से माफ़ी मांग मामला शांत करने को कहने लगा वो बोला खुदा के नाम पर मैं तुम्हारे आगे सज़दा करता हूँ चाहो तो मरे सर पर दस जूते मार लो मगर पंडित जी को जाने दो I चूंकि वह खुद उस बिरादरी के कद्दावर नेता का बेटा था और अपने लोगों में उसकी बड़ी साख थी अतः उसकी बात मानकर उन्होंने पंडित जी को जाने दिया I
जुम्मे की नमाज़ ख़त्म हो चुकी थी वह अपने घर को वापस लौट रहा था उसे अफ़सोस और सुकून था I अफ़सोस यह कि वह जुम्मे की नमाज़ अदा नहीं कर पाया और सुकून इस बात का कि खुदा के नाम पर सज़दा कर उसने एक बड़ा दंगा ताल दिया था और कई मासूमों की जान की रक्षा की थी I

दीपक पांडेय
जवाहर नवोदय विद्यालय
नैनीताल
263135

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